- बाढ़ आने पर डूब जाती हैं नदी तटों की रिहायशी बस्तियां
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। मानसून एक्सप्रेस की तेज रफ्तार शहर की दोनों नदियों को कभी भी बाढ़ की विभीषिका से घेर सकती है, लेकिन इसकी परवाह न तो नदियों के किनारे बसेरा बनाने वालों को हैं और न ही प्रशासन को। नदी तटों के जो इलाके फ्लड जोन में शामिल किए गए हैं, वहां आज भी नए मकान धड़ल्ले से बन रहे हैं जबकि दो साल पहले भारी वर्षा से यही इलाके नदियों में आई बाढ़ से डूब चुके हैं।
गर्रा और खन्नौत नदी के बीच बसे शहर में अब ऐसे भूखंड बचे ही नहीं, जहां नई कालोनियां विकसित हो सकें। शहर के मूल बाशिंदे नदी पार अथवा शहर केदूरस्थ इलाकों में मकान बनाना नहीं चाहते। लोगों की इसी मानसिकता के चलते अब दोनों नदियों के डूब क्षेत्र में मकान और व्यवसायिक प्रतिष्ठान बनाए जा रहे हैं। बीते एक दशक से इस प्रवृत्ति पर कोई रोक नहीं लगाए जाने से न केवल मकान, कई कॉलोनियां फ्लड जोन में विकसित हो चुकी हैं। बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा आने पर ऐसे क्षेत्रों में रह रहे लोगों की समस्याओं को प्रशासन भी संजीदगी से नहीं लेता। आइए, शहर के ऐसे ही इलाकों का जायजा लेते हैं, जहां लोग बाढ़ से बेखौफ होकर रह रहे हैं।
अजीजगंज
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गर्रा नदी के किनारे बसे अजीजगंज को बाढ़ से बचाने केलिए तटबंध नहीं बनाया जाता तो लोग नदी के घाट पर ही कब्जा कर लेते। अब कुछ नहीं सूझ रहा तो यहां के लोगों ने पुराने हाईवे के पूर्व दिशा में नदी किनारे स्थित शमशान भूमि मोक्ष धाम के नजदीकी भूखंड खरीदकर मकान बना लिए। वर्ष 2011 में आई बाढ़ के दौरान नए मकान कई दिन अथाह जलराशि के बीच टापू बने रहे। इसके बावजूद नए मकान बनने जारी हैं।
बाला तिराही
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गर्रा फाटक के नजदीक जिया खेल इलाके में घनी आबादी वाला यह मोहल्ला नदी की तलहटी में स्थित होने के कारण दशकों से बाढ़ की विभीषिका झेलने को अभिशप्त रहा है। अब चूंकि आबादी का दबाव बढ़ रहा है। इसलिए मोहल्ला धीरे-धीरे नदी तट की ओर बढ़ रहा है क्योंकि नए मकानों के लिए क्षेत्र में भूखंड उपलब्ध नहीं हैं। मामूली बरसात में भी नाले इस कदर उफना चलते हैं कि रोड पर चलना राहगीरों के लिए खतरनाक हो जाता है।
लोधीपुर
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हालांकि, शहर का यह पुराना मोहल्ला खन्नौत नदी से कुछ फासले पर काफी ऊंचाई पर बसा है, लेकिन पिछले कई साल से इसका विस्तार खतरनाक तरीके से नदी के बिल्कुल किनारे पुल के पास हो रहा है। इसकी शुरुआत एक राजनीतिक दल की पदाधिकारी ने फ्लड जोन की जमीन पर मकान व दुकानें बनाकर की और बाकी जमीन कब्जाने को एक धर्मस्थल की नींव रख दी। बाद में उनकी देखा-देखी अन्य लोगों ने भी डूब क्षेत्र में मकान खड़े कर लिए। एक व्यापार संगठन के पदाधिकारी ने कुछ समय तक इसके विरोध में आवाज भी उठाई।
इंदिरा नगर
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करीब डेढ़ दशक पहले यह कालोनी फ्लड जोन केमानकों को अनदेखा करके खन्नौत नदी के बिल्कुल किनारे विकसित कर दी गई। अब इस कालोनी में कई माननीयों के आवास हैं। इसलिए कालोनी की वैधता को लेकर प्रशासन भी कोई सवाल खड़ा नहीं करता। दो साल पहले बाढ़ के दौरान खन्नौत का पानी कालोनी के कम निचाई वाले तमाम मकानों में घुस गया था। उस वक्त इलाके के लोगों ने बाढ़ राहत के प्रयास किए जाने की मांग की, लेकिन प्रशासन ने उस पर कोई खास तवज्जो नहीं दी।
प्रताप एन्क्लेव
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बिसरात-केरूगंज मार्ग पर यह कॉलोनी भी बाढ़ की आपदा से बेपरवाह होकर अस्तित्व में लाई गई है। हालांकि, कॉलोनी के डेवलपर्स शुरू से तर्क दे रहे हैं कि नदी से काफी ऊंचाई होने के कारण कालोनी में बाढ़ आने की कोई संभावना नहीं है, लेकिन वे दो साल पहले की विभीषिका भूल रहे हैं जब अति वृष्टि से उफनाई खन्नौत ने कॉलोनी की पिछली चहारदीवारी को ठोकर मारकर मकानों के सामने पसरने का रास्ता बना लिया था। कालोनी के लोग भी मानते हैं कि बाढ़ की समस्या विकराल हुई तो कुछ दिन को पलायन करना मजबूरी होगी।
बिसरात रोड
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बिसरात रोड पर अंटा चौराहा के आगे से लेकर बंका घाट के पहले तक खन्नौत का पश्चिमी तट अवैध तरीके से बनाए जा रहे मकानों से लगातार घेरा जा रहा है। खास यह है कि आवास बनाने के लिए न केवल खाली पड़े नदी तटों के मालिकाना हक लिए जा रहे हैं, खादर इलाके को बेखौफ होकर पाटा जा रहा है। इस खेल में आम लोगों समेत कई कालोनाइजर और भू माफिया भी शामिल हैं। इनकी शिकायतें भी हुईं, लेकिन प्रशासन के कानों पर जूं आज तक नहीं रेंगी।
अवैध निर्माण पर जारी हो रहे नोटिस
‘नदियों केकिनारे बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में मकान बनाने वालों को विनियमित क्षेत्र के जेई और एई की रिपोर्ट पर नोटिस जारी होते हैं।...हजार काम हैं इसलिए यह बता पाना कठिन है कि अब तक कितने नोटिस जारी हुए। फिलहाल, गर्रा में बाढ़ की संभावना नहीं है। आज ही चेक किया, पानी पुराने पुल के पास सीढ़ी से नीचे चल रहा है। सदर क्षेत्र में सभी बाढ़ चौकियों केकर्मचारियों को अलर्ट कर दिया है और उन्हें बाढ़ से बचाव को 11 नावें उपलब्ध करा दी गई हैं।’
-जयनाथ यादव, एसडीएम/प्रभारी नियत प्राधिकारी, विनियमित क्षेत्र