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कोविंद के राष्ट्रपति बनने से बढ़ेगा सामाजिक संतुलन

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शाहजहांपुर। भाजपा की ओर से बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद का नाम राष्ट्रपति पद के लिए घोषित किए जाने पर पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद ने प्रसन्नता व्यक्तकी है। चिन्मयानंद ने कहा कि वर्तमान समय में कोविंद जैसे व्यक्तित्व की ही देश का नेतृत्व करने के लिए जरूरत थी। इससे सामाजिक संतुलन बनेगा।
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अमर उजाला से बातचीत में पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद ने कहा कि उन्होंने दो माह पहले ही उनको शुभकामनाएं दे दी थीं। वह 18 अप्रैल को पटना राजभवन में उनसे मिलने गए थे। तमाम राजनीतिक पहलुओं पर चर्चा के साथ राष्ट्रपति पद के लिए होने वाले चुनाव पर भी आपसी मंत्रणा हुई थी। वह बेहद सौम्य और सुलझे हुए व्यक्ति हैं। उनकी राष्ट्रपति के रूप में देश को जरूरत है। चिन्मयानंद ने कहा कि यदि वह राष्ट्रपति पद सुशोभित करते हैं तो यह उत्तर प्रदेश के लिए गौरव की बात होगी। कानपुर निवासी कोविंद लंबे अरसे से भाजपा से जुड़े हैं और योग्य हैं। उनका अनुभव सामाजिक समरसता के लिए बहुत काम आएगा। साथ ही वर्ग विशेष में भी अच्छा संदेश जाएगा। जो लोग भाजपा को दलित विरोधी बताकर दुष्प्रचार कर रहे थे, उनको भी समझ में आएगा कि भाजपा दलितों को वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल नहीं करना चाहती, बल्कि यही वह पार्टी है जो उनकी सच्ची हितैषी है।
चिन्मयानंद ने कहा कि राष्ट्रपति पद के लिए उनसे अच्छा प्रत्याशी और कोई नहीं हो सकता था। क्योंकि देश को योग्य नेतृत्व की जरूरत थी। वर्तमान में सामाजिक संतुलन बनाने की बहुत जरूरत महसूस हो रही थी। एक सवाल पर चिन्मयानंद ने कहा कि राम मंदिर प्रकरण में आरोपी होने के कारण पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और डॉ. मुरली मनोहर जोशी पहले ही पीछे हट गए थे।
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उन्होंने कहा कि भाजपा चाहती थी कि कांग्रेस डॉ. प्रणव मुखर्जी का नाम अपनी ओर से एक बार फिर घोषित करे और उन्हीं को फिर देश का नेतृत्व सौंपा जाए, लेकिन कांग्रेस ने ऐसा नहीं किया, बल्कि वह भाजपा से ही नाम बताने को कहती रही। भाजपा में दलित समाज से राष्ट्रपति तलाशने का काम काफी समय से चल रहा था, लेकिन योग्यता और अनुभव में उनके नाम पर मोहर लगा दी गई।
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