शाहजहांपुर। गांधी फैज-ए-आम महाविद्यालय की लाइब्रेरी 78 साल पुरानी है। यहां पर दुर्लभ पांडुलिपियों से लेकर पुस्तकाें का बड़ा संग्रह उपलब्ध है। लाइब्रेरी में 210 साल पुरानी हस्तलिखित तजकिरा गुलाम मोहिउद्दीन को संभालकर रखा गया है। दावा है कि इसकी एक प्रति यहां है तो दूसरी इंग्लैंड के म्यूजियम में। वहीं फारसी में रामायण भी है।
खान बहादुर फजलुर्रहमान खां ने वर्ष 1947 में इल्म की रोशनी को फैलाने के लिए कॉलेज की स्थापना की थी। उसी समय लाइब्रेरी की स्थापना की गई। वर्तमान में यहां 64331 पुस्तकें सुरक्षित हैं। विभिन्न विषयाें के साथ ही दुर्लभ पुस्तकाें का संग्रह भी महफूज हैं। कॉलेज की लाइब्रेरी में बड़ी संख्या में पांडुलिपियां हैं, जो काफी दुर्लभ हैं।
पुस्तकालय अध्यक्ष अनीस अहमद खां ने बताया कि तजकिरा गुलाम मोहिउद्दीन हस्तलिखित प्रति है। यह उर्दू जबान का कलमी नुख्सा है। पुस्तक को 1815 ईसवी में लिखा गया था। इसी तरह तारीख-ए-बहादुर खानी भी काफी प्राचीन है। 1286 हिजरी की तारीख-ए-रुहेलखंड, 1892 ईसवी की हाशिया बहर उल उलूम, 1877 ईसवी की दीवान-ए-फकीर समेत तमाम दुर्लभ हस्तलिखित पुस्तकें व पत्र को सहेजकर रखा गया है।
प्राचीन किताबों के पन्ने काफी जर्जर हो चुके हैं। ऐसे में इन पुस्तकों के सार को फेहरिस्त नुस्खाहा-ए-खत्ती नाम से हिंदी व अंग्रेजी में प्रकाशित कराया गया है, जिससे लोग आसानी से जानकारी प्राप्त कर सकें। इसके अतिरिक्त फारसी में रामायण व तीन गुणा दो इंच का बहुत छोटा कुरान शरीफ भी है। यहां पर धार्मिक किताबें बड़ी संख्या में उपलब्ध हैं। (संवाद)
शीशे में सुरक्षित की गईं पुस्तकें व दुर्लभ हस्तलेख
वर्षों पुरानी पुस्तकों को दोबारा से खोलकर पढ़ने पर पन्ने सुरक्षित नहीं रहेंगे। ऐसे में इन पुस्तकों को विशेष रूप से तैयार की गई शीशा जड़ित मेजों पर सजाया गया है, जिससे लोग देख सकें। मेजों पर लाइटिंग भी की गई है। पुस्तकालय अध्यक्ष बताते हैं कि कुछ समय पहले रजा लाइब्रेरी, रामपुर से टीम को बुलाया था। उन्होंने पुस्तकाें को साफ कर दवा लगाई, जिससे पुस्तकों को कीड़े न काट दें।
1947 से अब तक लाइब्रेरी चल रही है। अहसान उल्ला खां ने 101 पांडुलिपियां दान में दी थीं। वे आज भी वैसे ही सुरक्षित हैं। उसकी बहुत अच्छी तरीके से देखभाल हो रही है।
- डॉ.मोहसिन खान, प्राचार्य, जीएफ कॉलेज
जीएफ कॉलेज की लाइब्रेरी में सहज कर रखी गईं पांडुलिपियां। संवाद