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700 करोड़ के पुराने नोट आरबीआई भेजने की चुनौती

Sun, 25 Dec 2016 12:16 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला शाहजहांपुर
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केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई नोटबंदी न सिर्फ जनता पर भारी पड़ी है, बैंक अधिकारियों को भी समस्याओं ने घेर रखा है। नोटबंदी के बाद विभिन्न शाखाओं में जमा कराए पांच सौ और एक हजार के 700 करोड़ रुपये के नोट आरबीआई तक सुरक्षित पहुंचाना कैश की कमी से जूझ रहे बैंक अफसरों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। राष्ट्रीयकृत और निजी क्षेत्र की लगभग 30 बैंकों की जिले में 251 शाखाएं हैं। इसके साथ ही विभिन्न स्थानों पर 352 एटीएम भी स्थापित हैं। आठ नवंबर को नोटबंदी से पहले तक इन सभी शाखाओं और एटीएम के जरिए जिले में रोजाना औसतन 40 से 60 करोड़ रुपये का लेन-देन होता रहा, लेकिन प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संदेश प्रसारित होते ही पुराने नोट जमा करने की होड़ शुरू हो गई। भुगतान की तुलना में दोगुनी रकम जमा होने लगी। नतीजा यह हुआ कि बैंक शाखाओं में जमा-भुगतान काउंटरों पर सुबह से रात तक लोगों की कतारें नजर आने लगीं।  
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करेंसी चेस्ट में नोट रखने को नहीं बचा स्थान
जिले में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की टाउनहाल मेन ब्रांच समेत जलालाबाद और तिलहर में करेंसी चेस्ट हैं। अग्रणी बैंक बॉब की एकमात्र चेस्ट पुवायां ब्रांच में है। अधिकारियों के अनुसार सभी चेस्ट बंद हो चुके पुराने नोटों से इस कदर भर गई हैं कि वहां अब नए-पुराने नोट रखने की जगह नहीं बची है। चूंकि, जिला समेत आसपास के जिलोें की बैंक शाखाओं के लिए भारी मात्रा में कैश की नई खेप मंगाई जानी प्रस्तावित है, इसलिए जमा हुए बंद नोट का स्टॉक आरबीआई भेजने को प्राथमिकता देते हुए इसके लिए एसपी कार्यालय को भुगतान भी कर दिया है।
बैंकिंग में फिसड्डी साबित हुई अग्रणी बैंक बॉब
बैंकिंग के लिहाज से भारतीय स्टेट बैंक ने जमा के साथ भुगतान की व्यवस्था बनाए रखकर कतारबद्ध लोगों का धैर्य बनाए रखने में जहां अहम भूमिका निभाई, वहीं बॉब ने अग्रणी बैंक के तौर पर अपना नाम डुबोने में कोई कसर बाकी नहीं रखी। आठ नवंबर के बाद से अभी तक बॉब के सभी 68 एटीएम ठप हैं। इस बीच कैश की कमी और अन्य कारणों से भुगतान में संकट को लेकर हंगामेबाजी के अधिकांश मामलों में बॉब शाखाओं को जनता का गुस्सा भी झेलना पड़ा। आरबीआई से बड़े पैमाने पर कैश का ट्रांजिक्शन एक सामान्य प्रक्रिया है। नोटबंदी के बाद जमा हुए 500 और 1000 के पुराने नोटों का हिसाब रखते हुए उन्हें आरबीआई तक सुरक्षित भेजना कठिन कार्य है, लेकिन इसमें सभी बैंकों का स्टाफ तन्मयता से जुटा है। जमा हुए नोटों को चेस्ट से निकालने पर ही वहां अतिरिक्त कैश रखना संभव होगा। इस कारण नियमित बैंकिंग के अलावा पुराने जमा नोटों के निस्तारण को प्राथमिकता दी जा रही है। - वीएम गुप्ता, अग्रणी बैंक प्रबंधक
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