शाहजहांपुर। शासन ने सिंचाई विभाग की बाढ़ नियंत्रण से जुड़ी चार कटान निरोधक परियोजनाओं को स्वीकृति दे दी है। 7.43 करोड़ रुपये बजट वाली इन परियोजनाओं के तहत चिह्नित गांवों के पास पक्के तटबंध बनाने काम एक सप्ताह मेें शुरू हो जाने की उम्मीद है।
गंगा, रामगंगा, बहगुल और देवहा (गर्रा) सहित आधा दर्जन से अधिक नदियों वाले इस जनपद में हर साल मानसून सीजन में विभिन्न तहसीलों के दो सौ से ज्यादा गांव नदियां उफनाने पर बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। बाढ़ की विभीषिका से जलालाबाद और कलान तहसील में गंगा-रामगंगा के तटवर्ती गांव सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। उधर, तिलहर तहसील के खुदागंज ब्लॉक में देवहा की बाढ़ कहर ढाती है।
परियोजना-एक
खुदागंज क्षेत्र में गर्रा नदी के बाएं तट पर बसे गांव भुंडा हरवंशपुर उर्फ नौगवां समेत शहजादपुर, मीरपुर आदि आधा दर्जन गांव हर साल बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। गत वर्ष गर्रा उफनाने पर तमाम कच्चे और छप्परदार घर तहस-नहस हो जाने से संबंधित परिवारों को विस्थापन का दंश भुगतना पड़ा था। इन गांवों को बाढ़ से स्थायी तौर पर सुरक्षित रखने के लिए वहां 138.57 लाख रुपये की लागत से 400 मीटर लंबी पक्की ठोकरें बनाई जानी प्रस्तावित की गई है।
परियोजना-दो
खुदागंज क्षेत्र में ही गर्रा के दायें तट पर स्थित गांव चितीबोझी, बिहारीपुर, अजमाबाद आदि गांव भी हर साल बाढ़ से तबाही का मंजर देखने को अभिशप्त हैं। गत वर्ष इन गांवों में जिन परिवारों के घर गर्रा की बाढ़ बहा ले गई, वह अभी तक सामान्य स्थिति में नहीं आ सके हैं। इसीलिए चितीबोझी के पास जहां नदी का बहाव थोड़ा घुमाव लेता है, वहां 133.04 लाख रुपये लागत से 400 मीटर लंबाई में कटान निरोधक कार्य कराया जाएगा।
परियोजना-तीन
जलालाबाद क्षेत्र में रामगंगा के दायें किनारे पर बसे मई खुर्द कलां, अमृतापुर, घिरौला आदि आधा दर्जन से अधिक गांवों के हजारों लोग हर साल बाढ़ से घिरने पर मजबूर हो जाते हैं। ये सभी गांव पानी से चौतरफा घिरने पर टापू बन जाते हैं। यही नहीं, नदी का तेज बहाव अपने साथ इन गांवों की उपजाऊ कृषि भूमि भी बहा ले जाता है। इस ग्राम समूह को बाढ़ से बचाने के लिए 228.06 लाख रुपये का बजट स्वीकृत हुआ, जिससे 400 मीटर लंबे तटबंध बनेंगे।
परियोजना-चार
खुदागंज क्षेत्र में अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह के पैतृक गांव नवादा दरोबस्त के बाशिंदे भी हर साल गर्रा में आने वाली बाढ़ की विभीषिका झेलते हैं। नदी ज्यादा उफनाने पर निकटवर्ती खेड़ा, बहेड़ आदि गांवों को भी अपनी गिरफ्त में ले लेती है। चूंकि, शहीद के गांव में हो रहे विकास कार्यों की निगरानी के लिए क्षेत्र में अधिकारियों का आवागमन बना रहता है। इसलिए सिंचाई विभाग ने इस क्षेत्र को बाढ़ से सुरक्षित रखने के लिए 700 मीटर लंबाई में कटान निरोधक कार्य कराने का निर्णय किया है। इसके लिए शासन ने 243.63 लाख रुपये स्वीकृत किए हैं।
परौर में तटबंधों की मरम्मत की जरूरत
परौर। कलान तहसील में रामगंगा के किनारे बसे परौर और उसके आसपास मोहनपुर, बिचपुरी, नारायण नगर पूर्वी, दहेलिया, नारायणनगर पश्चिमी आदि गांवों में हर साल बाढ़ से भारी तबाही होती है। इन गांवों के बाशिंदे नदी के किनारे पक्की ठोकरें बनाने की लगातार कई वर्ष से मांग कर रहे थे। गत वर्ष शासन ने इन गांवों के किनारे 14 तटबंध बनाने को 11 करोड़ रुपये स्वीकृत किए, लेकिन सभी तटबंध सात करोड़ की लागत से बनकर तैयार हो गए। मानसून सीजन मेें यह काम कराए जाने के कारण गत वर्ष लगाए गए जिओ ट्यूब के अस्थायी तटबंध क्षतिग्रस्त होने लगे हैं। हालांकि, सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता विजय दिवाकर का कहना है कि तटबंधों की मरम्मत का काम शीघ्र शुरू हो जाएगा।
नदियों में बाढ़ से जनपद में होने वाले नुकसान को रोकने के लिए इस वर्ष शासन ने कटान निरोधक चार परियोजनाओें को समय से स्वीकृति दे दी है। इसलिए इसी सप्ताह से इन सभी परियोजनाओं पर एक साथ निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा। विभाग का यही प्रयास है कि मानसून सीजन शुरू होने से पहले ही सभी तटबंध बना लिए जाएं ताकि नदियां उफनाने पर तटीय गांवों में होने वाला नुकसान रोका जा सके। -सुनील कुमार भास्कर, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग