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अर्से बाद हाईस्कूल की मेरिट में आ पाए राजकीय-एडेड कॉलेज

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शाहजहांपुर। यूपी बोर्ड परीक्षा में शासन की सख्ती के चलते राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त कॉलेजों के दिन बहुर रहे हैं। इस बार की यूपी बोर्ड परीक्षा में राजकीय और सहायता प्राप्त स्कूल-कॉलेजों में अध्ययनरत हाईस्कूल के विद्यार्थियों ने टॉप-10 में पैठ बनाई है, लेकिन इंटरमीडिएट की मेरिट में अभी भी वित्तविहीन स्कूल छाए हैं। संतोषजनक बात यह है कि इंटर में एक-दो को छोड़कर शेष उन्हीं कॉलेजों के विद्यार्थियों ने टॉप-10 में स्थान पक्का किया है, जिनकी गिनती अच्छे कॉलेजों में की जाती है। इससे पहले तो इन नामी-गिरामी कॉलेजों को भी मेरिट सूची में स्थान नहीं मिल पाता था।
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एक-डेढ़ दशक पहले शहर में राजकीय इंटर कॉलेज, राजकीय कन्या इंटर कॉलेज, इस्लामिया कॉलेज का नाम था। अभिभावक इन्हीं कॉलेजों में बच्चों के नाम लिखाने को वरीयता देते थे। इधर कुछ वर्षों से इसमें बदलाव आया है। इसका कारण शिक्षकों की कमी के चलते पठन-पाठन प्रभावित होना है। शायद इसी वजह से मेरिट में ये शिक्षण संस्थाएं अपना स्थान नहीं बना पा रही हैं। इस बार परीक्षा में थोड़ी सख्ती होने परी बल्ले-बल्ले हो गई। हाईस्कूल की टॉप-10 सूची में वित्तपोषित सरदार पटेल हिंदू इंटर कॉलेज और इस्लामिया इंटर कॉलेज पहले दो स्थानों पर रहा। इसके अलावा पांचवें स्थान पर राजकीय इंटर कॉलेज ने कब्जा जमाया। सरदार पटेल कॉलेज दो छात्र पहले और तीसरे स्थान पर काबिज रहे। हां, इंटर में जरूर राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त कॉलेज का कोई छात्र मेरिट सूची में स्थान बनाने में कामयाब नहीं हो सका। इसमें सर्वाधिक आठ छात्र आदर्श बाल विद्यालय इंटर कॉलेज कटरा के हैं, जबकि सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज तिलहर ने भी धाक जमाई है।
माफिया के चंगुल से मुक्त होने पर ही सुधरेगी दशा
बोर्ड परीक्षा में जितनी सख्ती होगी, उतना ही शिक्षा माफिया पस्त होंगे। माफिया के पस्त होने से ही राजकीय और वित्त पोषित कॉलेजों का परीक्षा परिणाम उभर सकता है। इसकी शुरुआत हो चुकी है। हाईस्कूल मेरिट सूची में एसपी कॉलेज, इस्लामिया कॉलेज, राजकीय इंटर कॉलेज के छात्रों का शामिल होना इस बात की पुष्टि करता है। धीरे-धीरे सुधार होगा और इंटर की परीक्षा में भी राजकीय कॉलेजों के बच्चे जगह बनाएंगे। वैसे सभी स्कूल उनके हैं और वित्तविहीन स्कूलों के बच्चों को आगे बढ़ना चाहिए, लेकिन माध्यम स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होना चाहिए। राजकीय कॉलेजों में शिक्षकों की कमी भी शिक्षा को प्रभावित कर रही है। शिक्षा की गुणवत्ता का सही आंकलन नकलविहीन परीक्षा ही करा सकती है, जिसके लिए वह प्रशासन का सहयोग लेकर हमेशा ही प्रयत्नशील रहते हैं।
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डॉ. केएल वर्मा, डीआईओएस
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