लेखपाल भर्ती परीक्षा रविवार को जिला मुख्यालय के सभी 17 केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा के बीच शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुई। दोनों पालियों को मिलाकर 3210 आवेदकों ने परीक्षा छोड़ दी। परीक्षा की निष्पक्षता और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सेक्टर मजिस्ट्रेट और आब्जर्वर नियुक्त किए गए अधिकारी परीक्षा के दौरान लगातार मोबाइल रहे। शासन से जिले में परीक्षा के लिए आब्जर्वर नामित किए गए प्रमुख सचिव वाणिज्य कर ने एडीएम प्रशासन के साथ कई केंद्रों का दौरा करके वहां की व्यवस्थाएं जांचीं। परीक्षा आयोजक कंपनी टीसीएस के डिस्ट्रिक्ट कोआर्डिनेटर यादवेंद्र सिंह और उनके प्रतिनिधियों ने सभी केंद्रों पर परीक्षार्थियों की आंसर शीट अपने सामने सील कराईं।
लेखपाल भर्ती परीक्षा में जिला मुख्यालय के सभी केंद्रों पर 26192 आवेदक पंजीकृत किए गए थे। इसके बावजूद दोनों पालियों में केवल 22982 परीक्षार्थी शामिल हुए। परीक्षा में अधिकांश स्थानीय आवेदक शामिल हुए। अन्य शहरों के आवेदकों और उनके अभिभावकों ने भी शनिवार रात से यहां पहुंचना शुरू कर दिया था। इन सभी ने अपनी रिश्तेदारियों और परिचितों के यहां शरण ली, जिनका शहर में कोई परिचित नहीं था, उन्होंने रेलवे प्लेटफॉर्म पर रात बिताई।
सुबह 10.30 बजे की पाली में परीक्षा देने वाले आवेदकों को संबंधित केंद्रों पर आठ बजे पहुंचने का निर्देश दिया था। इसी तरह अपरान्ह तीन बजे से शुरू हुई दूसरी पाली के लिए आवेदकों का जमावड़ा एक बजे से केंद्रों पर लगने लगा। कुछ केंद्रों का कैंपस छोटा होने के कारण आवेदकों को परीक्षा केंद्र में दाखिल होने के लिए करीब एक घंटे तक प्रतीक्षा करनी पड़ी। परीक्षा के दौरान शासन से आब्जर्वर नियुक्त किए गए प्रमुख सचिव व्यापार कर हरेंद्र वीर सिंह ने एडीएम प्रशासन मुनेंद्र नाथ उपाध्याय के साथ कई केंद्रों का निरीक्षण किया। एडीएम उपाध्याय के कार्यालय से बताया गया कि देर शाम सभी केंद्रों से 3210 परीक्षार्थियों के अनुपस्थित रहने की सूचना मिली है।
लेखपाल भर्ती में भी महिलाओं की दस्तक
शाहजहांपुर। रविवार को हुई लेखपाल भर्ती परीक्षा में भी महिलाओं ने दस्तक दे दी है, जबकि फील्ड जॉब होने के कारण लेखपाल संवर्ग में शामिल होने से अभी तक महिलाएं कतराती रही हैं। परीक्षा में महिलाओं की संख्या खूब देखने को मिली।
टीईटी में कम नंबर होने से शिक्षा विभाग में नौकरी से वंचित चल रहीं युवतियों ने अब लेखपाल की नौकरी में किस्मत आजमाई है। लेखपाल परीक्षा देने पहुंचीं कुछ युवतियों और महिलाओं से बात की गई और उनसे यह जानने का प्रयास किया गया कि वह लेखपाल की नौकरी कैसे कर पाएंगी, क्योंकि राजस्वकर्मी होने के नाते गांव-देहात में उनके चक्कर अधिक लगेंगे और मेहनत भी अधिक होगी। इस पर अधिकांश का यही जवाब था कि पहले लगे तो, लग जाएगी तो काम भी कर ही लिया जाएगा।
मूलरूप से बिजलीपुरा की रहने वाली दिति वाजपेयी इनदिनों लखनऊ में मॉस कम्युनिकेशन का डिप्लोमा लेकर पत्रकारिता कर रही हैं। बोलीं: नौकरी तो लगे फिर किसी भी विभाग में ही क्यों न हो, कर ही ली जाएगी। इसी तरह हद्दफ चौकी की तृप्ति शुक्ला बीएड कर चुकी हैं, लेकिन शिक्षा विभाग में नौकरी नहीं मिलने से वह निराश थीं, इसलिए उन्होंने लेखपाल की सर्विस के लिए किस्मत आजमाई। उनका भी कहना था कि कोई काम कठिन नहीं है। नौकरी मिले तो सब हो ही जाएगा। पुंजिता सिंह बताती हैं कि वह जैतीपुर की रहने वाली हैं और बीएड कर चुकी हैं। शिक्षक बनने की राह में लेखपाल का सपना ही पूरा हो जाए, इसलिए वह परीक्षा देने आई थीं।
मुहल्ला बारादरी निवासी निशा उर्दू से एमए कर चुकी हैं, लेकिन कहीं सर्विस का मार्ग प्रशस्त नहीं हुआ तो उन्होंने लेखपाल पद के लिए फार्म डाल दिया। कहने लगीं कि पहले नौकरी लगे तो, फिर हो ही जाती है। इसी तरह बाडूजई प्रथम निवासी फौजिया इंटर पास हैं और वह भी लेखपाल बनना चाहती हैं। बृजविहार कालोनी निवासी पुष्पा चंद्रा बीए कर रही हैं। इन दोनों का भी यही कहना था कि पहले नौकरी तो लगे, फिर काम तो होने ही लगता है।
कर्मचारियों ने दिखाई मानवता
एसएस कॉलेज केंद्र पर लेखपाल भर्ती परीक्षा में सुबह की पाली में एक अभ्यर्थी ऐसा पहुंचा, जिसका एक पैर टूटा हुआ था और प्लास्टर होने के कारण वह चलने में असमर्थ था। चूंकि अभ्यर्थियों के अलावा अभिभावकों को परीक्षा कक्ष में जाने की अनुमति नहीं थी, इसलिए कॉलेज गेट से महाविद्यालय कर्मी राहुत तिवारी ने अपने साथी के साथ आनंदपुरम कालोनी निवासी शशिकांत कुशवाहा को दोनों हाथों से उठाकर परीक्षा कक्ष तक पहुंचाया और बाद में बाहर लाने में मदद कर मानवता का परिचय दिया। अभ्यर्थी की मदद करने वाले कर्मियों की सराहना वहां मौजूद अधिकारियों ने भी की।
मोबाइल पर मैसेज से मिलते रहे दिशा निर्देश
मोबाइल युग में प्रशासनिक और प्रतियोगी परीक्षाएं कराना आसान हो गया है। अब रविवार को हुई लेखपाल भर्ती परीक्षा को ही लें, तो केंद्र प्रभारियों को उनके मोबाइल पर उच्चाधिकारियों के दिशा निर्देश पल-पल पर मिलते रहे। इससे केंद्र प्रभारियों और प्रशासनिक अधिकारियों के सामने जो समस्याएं आती रहीं, उनका निस्तारण लगातार होता रहा।
सुबह से रहा अधिकारियों का मूवमेंट
लेखपाल भर्ती परीक्षा में अभ्यर्थियों की संख्या काफी अधिक होने के कारण प्रशासनिक अधिकारियों की चिंता स्वाभाविक थी। परीक्षा केंद्रों से लेकर उनकी सकुशल वापसी तक सब कुछ ठीक-ठाक निपट जाए, इसके अधिकारी तबका सुबह तड़के से एलर्ट हो गया था। जहां, केंद्र व्यवस्थापक उनके लगातार संपर्क में थे, वहीं एडीएम प्रशासन एमएन उपाध्याय और एडीएम वित्त एवं राजस्व पीके श्रीवास्तव, पुलिस अधिकारियों के साथ प्रत्येक केंद्र का भ्रमण कर लगातार स्थिति का जायजा ले रहे थे। आब्जर्बर के रूप में शासन स्तर से हरेंद्र सिंह ने भी केंद्रों का भ्रमण कर परीक्षा कक्षों का निरीक्षण किया और सीटिंग प्लान चेक किया। सभी केंद्रों पर एसडीएम और अन्य प्रशासनिक तथा विभागीय अधिकारी तैनात रहे।
ट्रैफिक पुलिस भी रही मुस्तैद
परीक्षा छूटने के बाद किसी भी मार्ग पर अथवा केंद्र के बाहर जाम की स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए ट्रैफिक पुलिस भी मुस्तैद रही। जिला अस्पताल के समीप, इस्लामिया कॉलेज के समीप मुख्य मार्ग होने के कारण जाम लगने की संभावना अधिक थी, इसलिए इन स्थानों पर यातायात पुलिस के कई जवान ड्यूटी पर अपने काम को अंजाम देते देखे गए। इनके अलावा पुलिस के अन्य जवान भी गर्रा फाटक समेत अलग-अलग स्थानों पर डटे रहे।
स्टेशन, बस अड्डे पर रहा पुलिस का कड़ा पहरा
शाहजहांपुर। लेखपाल भर्ती परीक्षा की तैयारियों को लेकर जहां जिला प्रशासन ने काफी सतर्कता दिखाई। वहीं पुलिस प्रशासन भी मुस्तैदी से डटा नजर आया। रेलवे स्टेशन से लेकर बस अड्डे तक ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए पुलिस का कड़ा पहरा रहा।
शनिवार रात से लेकर रविवार को दिन भर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म एक, दो और तीन के साथ सर्कुलेटिंग एरिया, टिकटघर और ओवरब्रिज पर महिला और पुरुष कांस्टेबिल मौजूद रहे। टे्रनों से आने वाले परीक्षार्थियों की संख्या भी कम रही। वहीं रोडवेज बस अड्डे पर ट्रैफिक पुलिस और सिविल पुलिस ने बसों पर यात्रियों को बैठाने और सड़क यातायात को नियंत्रित करने में तेजी दिखाई। इससे रोडवेज पर बहुत देर तक जाम की स्थिति नहीं रही।
हेल्प डेस्क से हुई परीक्षार्थियों को सुविधा
रेलवे स्टेशन पर उतरने वाले परीक्षार्थियों और रोडवेज बस अड्डे पर आने वाले बाहर के परीक्षार्थियों को उनके परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने के लिए रास्ता बताया। रेलवे स्टेशन पर मौजूद लेखपालों ने बताया कि करीब 100 लोगों ने सेंटरों के बारे में पूछताछ की। वहीं रोडवेज बस अड्डे पर पूछने वालों की संख्या अधिक नजर आई।