शाहजहांपुर। विशेष न्यायाधीश रश्मि नंदा ने नाबालिग से दुष्कर्म के एक मुकदमे में दोषी को 20 वर्ष के कारावास व 50 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया। इसी मुकदमे में दूसरे आरोपी को सात साल के कारावास व 15 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माने की 50 प्रतिशत धनराशि पीड़िता को बतौर प्रतिकर दिलाए जाने का आदेश दिया है।
सरकारी वकील राजीव अवस्थी और दिलीप चौहान के अनुसार जलालाबाद थाना क्षेत्र की महिला ने बताया कि 15 अप्रैल 2015 को उसकी 14 वर्षीय पुत्री को गांव का नूरहसन बहला-फुसलाकर भगा ले गया। नूरहसन का उसके घर पर आना-जाना था। 21 अप्रैल, 2015 की सुबह नूरहसन उसे गांव के बाहर छोड़ गया। उसकी पुत्री को भगाने में गांव के राजेश का भी हाथ था। पीड़िता की तहरीर पर पुलिस ने नूरहसन उर्फ भूरे व राजेंद्र के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया।
मामले की विवेचना के बाद अभियुक्त नूर हसन के खिलाफ पाक्सो एक्ट व राजेश के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में भेजा गया। विवेचना में आरोपी राजेंद्र के स्थान पर अभियुक्त का नाम राजेश पाया गया। अपर सत्र न्यायालय में मुकदमा चलने के दौरान सरकारी वकीलों के तर्कों को सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश ने आरोपी नूरहसन उर्फ भूरे को दोषी मानते हुए उसे 20 वर्ष की कारावास व 50 हजार रुपये और राजेश को सात वर्ष के कारावास व 15 हजार रुपये जुर्माने की सजा से दंडित किया।