शाहजहांपुर। उप्र गन्ना शोध परिषद में सोमवार को फिजी की 18 सदस्यीय टीम भ्रमण के लिए आई। टीम ने वैज्ञानिकों से बातचीत कर गन्ना उत्पादन बढ़ाने के संबंध में जानकारी ली।
गन्ना शोध परिषद के निदेशक डाॅ. सुधीर शुक्ल ने भ्रमण टीम के लीडर सुनील देव चौधरी और अन्य सदस्यों का माला पहनाकर स्वागत किया। निदेशक ने संस्थान द्वारा गन्ना उत्पादन के क्षेत्र में किए जा रहे नवीन शोधों के बारे में बताया। निदेशक ने बताया कि अधिक उत्पादन के लिए मृदा की उर्वरता को बनाए रखना बहुत आवश्यक है। मृदा की उर्वरता तभी बनाई रखी जा सकती है जब मृदा में प्रचुर मात्रा में कार्बनिक पदार्थ हों। इससे मृदा में सूक्ष्म जीवों की उपलब्धता बढ़ती है। इसके साथ-साथ नवीन गन्ना किस्में, बीज उपचार, मृदा उपचार, गन्ना बुवाई की विधि, सहफसली खेती, पेड़ी प्रबंधन, ड्रिप इरिगेशन आदि के द्वारा गन्ना उत्पादन में वृद्धि की जा सकती है। डाॅ. सुजीत प्रताप सिंह ने फिजी टीम के समक्ष एक संक्षिप्त प्रस्तुतीकरण भी दिया। फिजी टीम को निदेशक द्वारा संस्थान की विभिन्न प्रयोगशाला एवं प्रक्षेत्र का भ्रमण भी कराया गया। फिजी टीम के लीडर सुनील देव चौधरी ने बताया कि फिजी की औसत उपज मात्र 50 टन/हेक्टेयर है जबकि उत्तर प्रदेश में 83 टन प्रति हेक्टेयर है। इससे फिजी के किसानों को उनकी लागत का भरपूर लाभ नहीं मिल पा रहा है। किसान सामान्य तौर पर गन्ने की फसल को जला देते है जिससे मृदा की उर्वरता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उप्र गन्ना एवं चीनी उत्पादन में प्रथम स्थान पर है इसलिए यह दल गन्ना उत्पादन की बारीकियां जानने आया है। इस तकनीक को अपने देश में अपनाकर अधिक उत्पादन प्राप्त करना उद्देश्य है।