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आवास को तरस रहे बेघर ग्रामीण परिवार, मौज मार रहे अपात्र

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शाहजहांपुर। सिस्टम की ढिलाई और उसमें लगे भ्रष्टाचार के घुन के कारण गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले ग्रामीण बेघर परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना मजाक बनकर रह गई है। तमाम पात्र परिवार प्लास्टिक की पन्नियां तानकर सर्दी का पूरा सीजन उनके नीचे गुजारने को मजबूर हुए। दूसरी ओर, ग्राम प्रधानों और पंचायत सचिवों की साठगांठ से तमाम ऐसे परिवार सरकार से मिले आवास का सुख भोग रहे हैं, जिनके पहले से मकान बने हैं या फिर पूर्ववर्ती सरकारों से लागू इंदिरा, लोहिया आवास योजना से संतृप्त हो चुके हैं। जैतीपुर के अमरेड़ी गांव में अपात्र को आवास दिए जाने का मामला विधान परिषद में गूंजने के बाद अधिकारियों ने ऐसी अन्य शिकायतों की जांच के लिए आवासों का सत्यापन कार्य शुरू करा दिया है।
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प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत चालू वित्त वर्ष के आरंभ में शासन से विभिन्न ब्लॉकों में 4160 आवास बनाने का लक्ष्य दिया गया। गत वर्ष दिसंबर तक अधिकांश लाभार्थियों को 40 हजार रुपये की पहली किश्त और 70 हजार की दूसरी किश्त मिल चुकी है, लेकिन इसी बीच स्टेट नोडल एकाउंट में बजट की धनराशि खत्म हो गई और तमाम लाभार्थियों को तीसरी किश्त के 10000 रुपये नहीं मिल पाए। नतीजे में वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही तक केवल 145 आवास पूर्ण निर्मित हो सके। हाल ही में शासन ने पूर्व निर्धारित लक्ष्य में 2499 आवास बढ़ाकर नया लक्ष्य 6659 नियत कर दिया।

6630 स्वीकृत आवासों में केवल 45 फीसदी हो सके पूर्ण निर्मित
संशोधित आवास लक्ष्य के सापेक्ष मांग अधिक होने से विकास खंड स्तर पर कुल 8656 बेघरों ने पंजीकरण कराया। जिओ टैगिंग के बाद कुल 6630 लाभार्थियों को आवास स्वीकृत हुए, लेकिन सिर्फ 3007 आवास पूर्ण निर्मित हो सके। खास यह है कि तीसरी अंतिम किश्त का भुगतान 3259 लाभार्थियों को किया जा चुका है। जाहिर है कि विभिन्न ब्लॉकों में 252 ऐसे लाभार्थी हैं, जिन्होंने तीसरी किश्त की धनराशि आवासों की फिनिशिंग पर व्यय करने के बजाय अन्य मदों में खर्च कर ली। कुछ ऐसे लाभार्थी भी हैं, जिन्होंने अंतिम किश्त का इंतजार करने के बजाय रकम उधार लेकर अपने आवास पूर्ण निर्मित करा लिए। दूसरी ओर, तमाम ऐसे पात्र लोग भी हैं जो आवास के लिए भटक रहे हैं। ऐसे वंचितों की शिकायत एमएलसी अमित यादव द्वारा विधान परिषद में उठाई तो अधिकारी भी जांच और सत्यापन को सक्रिय हुए।
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विकास खंड वार आवास लक्ष्य, स्वीकृति एवं निर्माण की कार्य प्रगति
विकास खंड लक्ष्य स्वीकृत निर्मित आवास
0 बंडा 626 624 279
0 भावलखेड़ा 326 326 190
0 ददरौल 304 304 186
0 जैतीपुर 431 431 113
0 जलालाबाद 816 812 463
0 कलान 625 625 4 145
0 कांट 414 414 216
0 कटरा खुदागंज 514 491 250
0 खुटार 337 337 186
0 मदनापुर 413 413 209
0 मिर्जापुर 663 663 260
0 निगोही 212 212 87
0 पुवायां 280 280 133
0 सिंधौली 466 466 191
0 तिलहर 232 232 99

करीब दो माह तक स्टेट नोडल एकाउंट में बजट की धनराशि उपलब्ध नहीं होने से आवासों का काम रुका रहा। हाल ही में शासन ने आवास लक्ष्य बढ़ा दिया है और अब संशोधित लक्ष्य के अनुरूप आवास बनवाए जा रहे हैं। आवास स्वीकृति में पात्रता का निर्धारण बहुधा ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव द्वारा संयुक्त रूप से किया जाता है, इसलिए उनके स्तर से गड़बड़ी से इनकार नहीं किया जा सकता। अधिकांश शिकायतें आवास स्वीकृत नहीं होने की प्राप्त हो रही हैं। अपात्रों को आवास दिए जाने की विभिन्न ब्लॉकों से लगभग 15 शिकायतें मिली हैं और बीडीओ के स्तर से उनकी जांच कराई जा रही है।
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-चंद्रशेखर, परियोजना अधिकारी, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण
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