शाहजहांपुर। पिछले दो वित्त वर्षों में 3.92 अरब की जिला योजनाओं से सरकारी विभागों ने जिले में विभिन्न कार्य कराए। चालू वित्त वर्ष 2017-18 में विभाग वार अनुुमानित परिव्यय को ध्यान में रखते हुए 3.95 अरब रुपये की जिला योजना प्रस्तावित की गई है। प्रभारी मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को विकास भवन सभागार में प्रस्तावित जिला योजना समिति की बैठक में प्रस्तावित परिव्यय को औपचारिक अनुमति मिलने की उम्मीद है।
जिला योजना में शामिल 47 विभागों और कार्यक्रमों के लिए वित्त वर्ष 2013-14 व 2014-15 में 1.72 अरब का परिव्यय अनुमोदित किया गया था। बाद में कुल राज्य संसाधनों के कुल परिव्यय में केंद्रांश, जिला पंचायत और नगर निकायों के संसाधनों से प्राप्त धनराशि भी जिला योजना में समाहित कर दी गई। इस कारण वित्त वर्ष 2015-16 व 2016-17 में जिला योजना में 3.92 रुपये का बजट अनुमोदित हुआ। इस बार अनुमानित परिव्यय में तीन करोड़ रुपये की बढ़ोत्तरी की गई है।
अनुुमोदित परिव्यय धनराशि पाने को तरसे विभाग
भले ही जिला योजना के भारी-भरकम परिव्यय को हर साल अनुमोदित किया जाता हो, उसके सापेक्ष बजट की धनराशि पाने के लिए शासन की प्राथमिकता सूची वाले कई विभागों को पूरे साल तरसना पड़ा। उदाहरणार्थ, कौशल विकास को सरकार बढ़ावा देना चाहती है, लेकिन गत जिला योजना में आईटीआई को प्रशिक्षण मद में 1.80 करोड़ रुपये के सापेक्ष केवल 59 लाख रुपये मिले। इसी तरह कृषि विभाग को 32 लाख के सापेक्ष 8.72 लाख रुपये, लघु व सीमांत कृषकों को आर्थिक सहायता मद में 1.99 करोड़ के बजाय 61.36 लाख रुपये, पशुपालन को 4.53 करोड़ के बजाय 32.99 लाख रुपये और मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना के क्र्रियान्वयन को 66.80 करोड़ के बजाय 43.59 करोड़ रुपये से संतोष करना पड़ा।
बजट में कटौती से कई मदों के काम प्रभावित
शासन द्वारा बजट में कटौती किए जाने से दुग्ध विकास, पंचायती राज, निजी लघु सिंचाई, राजकीय लघु सिंचाई, अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत, खादी एवं ग्र्रामोद्योग, पर्यावरण सुधार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, प्राथमिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, ग्रामीण पेयजल, नगर विकास, ग्रामीण आवास आदि को पर्याप्त बजट नहीं मिलने से नए स्कूलोें के भवन निर्माण, डेयरियों की स्थापना, सिंचाई के लिए बोरिंग, हैंड पंपों की मरम्मत आदि काम प्रभावित हुए।
इन मदों में बजट की स्वीकृति रही शून्य
मत्स्य विकास, सहकारिता, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण, रेशम उद्योग, परिवार कल्याण, होम्योपैथी चिकित्सा, आयुर्वेदिक चिकित्सा, पूल्ड आवास, पुष्टाहार आदि कुछ ऐसी मदें हैं, जिनके लिए गत जिला योजना में कोई परिव्यय अनुमोदित नहीं हुआ और हुुआ भी तो उसके अनुरूप बजट नहीं मिल सका।
जिला योजना समिति ने बीते वित्त वर्ष में विभिन्न कामों के लिए जो परिव्यय अनुमोदित किया, उसके सापेक्ष जो भी धनराशि प्राप्त हुई, उसे संबंधित कार्यों पर शत-प्रतिशत व्यय किया गया है। यह समिति के सदस्यों और शासन पर निर्भर करेगा कि इस बार अनुमोदित परिव्यय के सापेक्ष कितनी धनराशि स्वीकृत होेती है।
-टीके शिबु, मुख्य विकास अधिकारी