यूपी के उन्नाव में एक छात्रा का अश्लील एमएमएस बनाकर उसे ब्लैकमेल करने का मामला सामने आया है। ब्लैकमेलिंग से तंग आकर छात्रा कई बार आत्महत्या का प्रयास भी कर चुकी है, लेकिन अभी तक उसे न्याय नहीं मिला है।
उन्नाव के सफीपुर में संचालित शारदा शिशु मंदिर के प्रबंधक के पुत्र स्वप्निल मिश्रा ने बीए की एक छात्रा को सिलाई प्रशिक्षण केंद्र जाते समय रोक लिया और जबरदस्ती स्कूल में खींच ले गया।
स्वप्निल ने छात्रा की मोबाइल से अश्लील क्लिप बनाई। आरोप है कि इसके बाद स्वप्निल छात्रा को ब्लैकमेल करने लगा। फिर उसने यह अश्लील क्लिप एमएमएस के जरिए अपने दोस्तों को भी दे दी।
परेशान होकर छात्रा ने अपने परिजनों को इसकी जानकारी दी। छात्रा के पिता ने सफीपुर कोतवाली में शिकायत की। पहले तो पुलिस समझौता कराने में लगी रही लेकिन बाद में उसने मुकदमा दर्ज कर स्वप्निल को जेल भेज दिया।
हालांकि छात्रा के पिता का आरोप है कि पुलिस ने मामले के आरोपी स्वप्निल पर हल्की धाराएं लगाई हैं। वह दोषी के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई के लिए पुलिस अधीक्षक और डीएम से मिलेंगे।
कई बार आत्महत्या का प्रयास
एमएमएस प्रकरण में पीड़ित छात्रा ने बुधवार को भी आत्महत्या का प्रयास किया। परीक्षा के लिए जाते समय उसने चलती मोटरसाइकिल से कूदने की कोशिश की। पिता की सतर्कता से वह असफल रही। घर में भी उसने कई बार जान देने की कोशिश की। छात्रा की मां का भी बुरा हाल है। बदनामी के कारण परिवार के ज्यादातर सदस्य घर के अंदर ही रह रहे हैं।
मोबाइल और लैपटॉप भी नहीं लिया कब्जे में
आरोपी का मोबाइल, लैपटॉप आदि पुलिस ने अब तक कब्जे में नहीं लिया है। सूत्रों का कहना है कि इसमें कुछ अन्य युवतियों की भी अश्लील क्लिप हो सकती है। पुलिस की लापरवाही में युवक के परिजन इसे नष्ट भी कर सकते हैं।
किसी और ने बनाई है क्लिप?
इस मामले में एक पेंच यह भी है कि छात्रा की अश्लील क्लिप आरोपी के किसी दोस्त ने बनाई है। प्रबंधक पुत्र जिस समय छात्रा को लेकर कमरे में पहुंचा, उसके पीछे कोई और भी था, क्योंकि क्लिप दूर से बनाई गई है और यह साफ है कि मोबाइल उस समय मूवमेंट में था। क्लिप में जिस तरह से कैमरा कभी जमीन और कभी छत की ओर हुआ है, इससे साफ है कि इसे छुपकर बनाया गया है।
एएसपी से मिली छात्रा
एमएमएस कांड की शिकार हुई छात्रा बुधवार को अपने दो वकीलों के साथ अपर पुलिस अधीक्षक सर्वानंद यादव से मुलाकात की। वकीलों ने पीड़िता के 164 (मजिस्ट्रेट के सामने) के तहत बयान दर्ज कराने की मांग की। अपर पुलिस अधीक्षक ने पीड़िता के अधिवक्ताओं को पहले 161 के तहत पहले विवेचक (आईओ) को बयान दर्ज कराने को कहा। एएसपी ने बताया कि मजिस्ट्रेट के सामने बयान से पहले आईओ के सामने बयान होना जरूरी है। इन्हीं बयानों के आधार पर आईओ चार्जशीट तैयार करता है।
क्या कहती है पुलिस
एसपी राकेश प्रधान से जब पूछा गया कि पुलिस ने मामला हल्की धाराओं में क्यों दर्ज किया, तो उनका कहना था कि आरोप गलत है। परिवार के लोग तो मुकदमा दर्ज कराने से पीछे हट रहे थे। पुलिस के कहने के बाद वह रिपोर्ट दर्ज कराने को तैयार हुए। पीड़ित लड़की ने आत्महत्या का प्रयास किया है, क्या इसकी जानकारी है, यह पूछने पर उन्होंने कहा कि ऐसी कोई जानकारी नहीं दी गई है। इस संबंध में परिजनों से बात की जाएगी।
उन्होंने बताया कि आरोपी के लैपटाप और मोबाइल के साथ ही साक्ष्य संबंधी अन्य तथ्यों को भी पुलिस ने कब्जे में ले लिया है। जब उनसे पूछा गया कि क्या एमएमएस बनाने वाले दूसरे युवक का कुछ पता चला, उन्होंने कहा कि पुलिस तफ्तीश कर रही है। घटना में दो-चार जो भी शामिल होंगे सभी के खिलाफ कार्रवाई होगी।