फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी: निकायों में हजारों भर्तियां, चहेतों को नौकरी

Wed, 26 Jun 2013 01:07 AM IST
शैलेंद्र श्रीवास्तव
विज्ञापन
विज्ञापन
उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी में भर्ती के नाम पर कैसे मनमानी की जाती है इसका अंदाजा निकायों में हुई भर्तियों से की जा सकती है।
विज्ञापन


निकायों में भर्ती का आलम यह है कि चहेतों को नौकरी देने के लिए स्वीकृत पदों से अधिक भर्तियां की जा रही हैं। यह खुलासा स्थानीय निकाय निदेशालय की जांच में हुआ है।

जांच में पाया गया है कि निकायों में अकेंद्रीयत सेवा के स्वीकृत 4651 पदों के सापेक्ष 6360 लोगों की भर्तियां कर ली गई हैं। स्थानीय निकाय निदेशालय ने नगर आयुक्त और अधिशासी अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है।
विज्ञापन


उत्तर प्रदेश में 630 निकाय हैं। इसमें 13 नगर निगम, 194 पालिका परिषद और 423 नगर पंचायतें हैं। नगर निगम में नगर आयुक्त और पालिका परिषद व नगर पंचायतों में चेयरमैनों को भर्ती का अधिकार है। नगर आयुक्त और चेयरमैन इस अधिकार का बेजा फायदा उठाते हैं।

वे अपने हिसाब से अकेंद्रीयत सेवा का विज्ञापन निकाल कर भर्तियां कर लेते हैं। कहा तो यहां तक जाता है कि पहले भर्तियां की जाती हैं और बाद में विज्ञापन निकाले जाते हैं। यही वजह है कि स्वीकृत पद से अधिक भर्तियां कर ली जाती हैं।

अखिलेश सरकार ने बसपा राज में निकायों में हुई भर्तियां का ब्यौरा मांगा था, लेकिन अधिकारी इसे दे नहीं रहे थे। इसलिए इसकी निकायवार जांच कराई गई तो कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई। इसमें पता चला है कि निकायों में जो पद नहीं हैं या समाप्त कर दिए गए हैं उस पर भी भर्तियां कर ली गई हैं।

उदाहरण के लिए पीलीभीत में मोहर्रिर का पद नहीं है। इसके बाद भी 10 लोगों की भर्तियां की गई। इसी तरह गेटमैन के पद पर पांच और भिश्ती के पद पर चार लोग रखे लिए गए। इसी तरह अन्य निकायों में भी भर्तियों के नाम पर खेल किया गया। स्थानीय निकाय निदेशालय के जांच में अधिक भर्तियों का खुलासा होने के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
विज्ञापन


निकायों में समूह ग व घ में कई ऐसे पद हैं जिन पर स्वीकृत पदों से अधिक कार्मिक तैनात हैं या पद न होते हुए भी भर्तियां कर ली गई हैं। इस संबंध में शासन को स्पष्टीकरण देना है। इसलिए नगर आयुक्त और अधिशासी अधिकारियों को स्पष्टीकरण दिया गया है। उन्हें इसका जवाब देते हुए स्थिति स्पष्ट करनी है कि स्वीकृत पदों से अधिक भर्तियां किस आधार पर की गई हैं।   अनूप कुमार श्रीवास्तव, संयुक्त निदेशक, स्थानीय निकाय
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें