सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश से जल निगम के करीब तीन हजार कर्मचारियों की 60 वर्ष की आयु में रिटायरमेंट पर मिलने वाला लाभ मिलेगा।
राज्य सरकार ने इन कर्मचारियों को 58 साल की आयु में ही रिटायर कर दिया था। अब इन्हें दो साल की अवधि के दौरान पदोन्नति, शेष वेतन का एरियर व अन्य लाभ दिया जाएगा।
बढ़ेगा 100 करोड़ का बोझ
एक आकलन के मुताबिक इससे जल निगम पर करीब 100 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। राज्य सरकार ने 28 नवंबर 2001 को शासनादेश जारी यह व्यवस्था लागू की थी कि सरकारी विभागों में कार्यरत कर्मचारी 58 साल की जगह अब 60 वर्ष की आयु में रिटायर होंगे।
खटखटाया था हाईकोर्ट का दरवाजा
फिर भी, जल निगम कर्मचारी नियमावली में रिटायरमेंट की आयु 58 वर्ष ही रखी गई। इसके विरोध में जल निगम के कर्मचारियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां उनके पक्ष में फैसला सुनाया गया।
सुनवाई होती रही, और रिटायर हो गए हजारों
जल निगम ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अनुज्ञा याचिका दाखिल कर दी। इधर मामले में सुनवाई चलती रही और उधर जल निगम में नवंबर 2001 से अक्तूबर 2011 के बीच करीब तीन हजार कर्मचारी रिटायर हो गए।
राज्य सरकार ने बदला फैसला
हालांकि राज्य सरकार ने नवंबर 2011 में एक शासनादेश जारी कर जल निगम में रियाटरमेंट की आयु 58 से बढ़ाकर 60 साल कर दी। नतीजतन नवंबर के बाद जल निगम के कर्मचारी भी 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होने लगे।
लेकिन नहीं दिया लाभ
लेकिन राज्य सरकार ने नवंबर 2001 से अक्तूबर 2011 तक 58 वर्ष की आयु में रिटायर होने वाले कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब इन्हें भी रिटायरमेंट के दो साल की अवधि के दौरान पदोन्नति व अन्य सेवाओं का लाभ मिलना सुनिश्चित हो गया है।