विकास भवन परिसर में स्थित जिला दिव्यांगजन अधिकारी कार्यालय में बाबू की खाली कुर्सी।संवाद
जब समय से अफसर ही दफ्तार नहीं आएंगे तो मातहत मनमर्जी के हो ही जाएंगे। कुछ ऐसा ही नजारा बुधवार को विकास भवन के कई कार्यालयों में देखने को मिला। इतना ही नहीं, कई कार्यालयों के ताले तक नहीं खुले थे। लेटलतीफी से आए लिपिकों ने पहले आराम फरमाया, फिर फाइलें पलटनी शुरू की। इस दौरान दूरदराज से आए फरियादी अफसरों के इंतजार में इधर-उधर भटकते रहे।
जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय का पर्दा सुबह 10:36 बजे तक गिरा हुआ था। लिपिक बैग लेकर सीढ़ी से आते दिखे। वह धीरे से कार्यालय में पटल पर चले गए। ठीक उसी समय जिला कृषि अधिकारी वीरेंद्र कुमार भी अपने कार्यालय पहुंचे। डीपीओ दुर्गेश कुमार ने बताया कि अवकाश पर हूं। ब्रजेंद्र जायसवाल के पास चार्ज है। मोबाइल फोन पर उन्होंने बताया कि पनियरा निरीक्षण करने आया हूं।
जिला समाज कल्याण कार्यालय में 10:40 बजे सबया गांव की संतोषी मिलीं। वह पेंशन के बारे में पूछताछ करने आईं थीं। एक लिपिक अपने पटल पर नहीं दिखे। 10:48 बजे जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी कार्यालय में लिपिक काम करते दिखे, लेकिन अधिकारी नहीं थे। छात्रवृति के बारे में जानकारी लेने नैना सहानी आईं थीं। उन्होंने बताया कि छात्रवृति नहीं मिली है। जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी कन्हैया यादव ने बताया कि परीक्षा ड्यूटी लगी है।
परियोजना निदेशक कार्यालय में 10:53 बजे मुख्यमंत्री आवास का पटल देख रहे लिपिक नहीं दिखे। बताया गया वह जरूरी फाइल लेकर कहीं गए हैं। वरिष्ठ लिपिक कार्यालय के बाहर मैदान में मोबाइल फोन पर बात करते दिखे। उनसे मिलने के लिए मोहन आए थे। परियोजना निदेशक का कक्ष खाली था। दो-तीन लोग आवास के बारे में शिकायत करने आए थे, लेकिन मायूस होकर चले गए। अब तक परियोजना निदेशक का चार्ज देख रहे जिला विकास अधिकारी आरके पांडेय ने बताया कि नवागत पीडी रामदरस आ चुके हैं। वह उनके कार्यालय में बैठकर जरूरी विषय पर चर्चा कर रहे हैं।