बारिश से ठंड के साथ बढ़ी गलन
- खेतों में जलभराव न होने दें किसान, खाद का अभी न करें छिड़काव
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। बेमौसम दो दिनों से रुक-रुक कर हो रही बारिश से ठंड के साथ गलन बढ़ गई है। सड़कों पर कींचड़ जमा होने से फिसलन बढ़ गई है। इसके साथ ही दहलन और तिलहन की फसलों को नुकसान होने का खतरा बढ़ रहा है। जिससे किसान चिंतित हैं।
बुधवार रात मौसम का मिजाज बदला और हल्की बारिश शुरू हुई। जिसकी वजह से गलन के साथ ठिठुरन बढ़ गई। बृहस्पतिवार रात में भी बारिश
हुई और शुक्रवार को आसमान में बदली छाई रही। बारिश से शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र की सड़कें कीचड़ से सन गईं। जिससे लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। तहसील मुख्यालय से जनपद मुख्यालय को जोड़ने वाला धनघटा-खलीलाबाद मार्ग, मेंहदावल-खलीलाबाद मार्ग पर कीचड़ फैलने से फिसलन हो गई है। राहगीर अतुल पांडेय, अकुंर पांडेय, धीरज पांडेय, सुनील, दिलीप कुमार, महेश कुमार आदि ने कहा कि बारिश होने से कीचड़ हो गया है, जिससे दिक्कत हो रही है। सरकारी कार्यालयों में भी भीड़भाड़ कम दिखी। मेंहदावल बाईपास पर लोग ओवरब्रिज के नीचे खड़े होकर खुद को सुरक्षित किए। दूूसरी तरफ किसान हरिश्चंद्र चौधरी, मेवालाल यादव, सोनू गौड़, विजय शुक्ला, प्रयाग पांडेय आदि ने कहा कि बारिश से दलहनी और तिलहनी फसलों को नुकसान होने का खतरा बढ़ गया है। कृषि विशेषज्ञों की सलाह है कि किसान खेतों में जलभराव न होने दें और अभी उर्वरक का छिड़काव कतई न करें।
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जलभराव होने पर फसलों को होगा खतरा: कृषि वैज्ञानिक
कृषि विज्ञान केंद्र बगही के कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर अरविंद सिंह ने बताया कि अधिक बारिश होने पर यदि खेतों में जलभराव होगा तो फसलों को नुकसान होगा। ऐसे में किसान खेतों से पानी की निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करें। यदि गेहूं की बुवाई समय से हुई है और फसल उग गई तो उसे काफी फायदा होगा। जिन किसानों ने समय से बुवाई नहीं किया और अभी बीज अंकुरित नही हुआ है तो उसे नुकसान पहुंचेगा। गन्ने की फसल के लिए बारिश फायदेमंद है। सरसों, मटर और आलू की फसलों के लिए बारिश नुकसानदेह है।
बारिश गेहूं की फसल के लिए फायदेमंद है। किसनों को गेहूं की सिंचाई से राहत मिली है। अधिक बारिश होने की दशा में दलहनी और तिलहनी फसलों को नुकसान पहुंचेगा। वैसे बारिश हल्की हुई है, इसलिए आलू व सरसों की फसल को भी नुकसान होने की कम संभावना है। वैसे जहां पर पानी जमा होता है, वहां किसानों को चाहिए कि आलू की फसल में पानी एकत्र न होने दें।
- पीसी विश्वकर्मा, जिला कृषि अधिकारी
शोभित कुमार पांडेय