फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नहरों से खेत तक नाली बनाने की योजना फेल

विज्ञापन
विज्ञापन
नहरों से खेत तक नाली बनाने की योजना फेल
विज्ञापन

किसानों ने नाली निर्माण के लिए मुफ्त में जमीन देने से किया इनकार
कार्यदायी संस्था को शासन को लौटाने पड़े ढाई करोड़
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। नहरों से किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने की मुहिम को तगड़ा झटका लगा है। किसानों ने मुफ्त में नाली बनाने के लिए कार्यदायी संस्था को जमीन देने से इनकार कर दिया। इसकी वजह से कार्यदायी संस्था को ढाई करोड़ रुपये लौटाना पड़ा।
सरयू नहर प्रणाली फेज तीन के तहत नहरों से हर किसान के खेतों तक पानी पहुंचाने की योजना संचालित है। इसके लिए जिले में 36 करोड़ की परियोजना है। शासन ने भूमि संरक्षण विभाग को कार्य कराने की जिम्मेदारी दी है। इसमें नाली निर्माण के लिए किसानों से ली जाने वाली जमीन का मुआवजा दिए जाने का प्रावधान नहीं है। किसानों से मुफ्त जमीन लेकर नाली निर्माण किया जाना है। भूमि संरक्षण अधिकारी अरविंद वर्मा बताते हैं कि पिछले वित्तीय वर्ष में सात करोड़ रुपये का टेंडर हुआ था। इसमें से विभाग को ढाई करोड़ रुपये अवमुक्त हुआ था। बांसगांव, चमरसन माइनर, सरौली, सुजिया, भुवनडाड़ आदि स्थानों पर नहरों से किसानों के खेत तक नाली निर्माण कराना है। कच्ची नाली के लिए तीन फीट और पक्की नाली के दो फीट जमीन चाहिए। बांसगांव रजवाहे पर 110 मीटर तक दूरी तक पक्की नाली बनी है। जिस पर 1.80 लाख रुपये खर्च हुआ है। तीनों इकाई में सिर्फ 4.50 लाख का काम हो पाया है। नाली निर्माण नहीं हो पाने के पीछे वजह है कि योजना में किसानों को मुआवजा दिए जाने का प्रावधान ही नहीं है। इसमें किसानों से नाली निर्माण के लिए मुफ्त में जमीन ली जानी है। किसान नाली निर्माण के लिए मुफ्त जमीन देने से मना कर रहे हैं। किसान मुआवजे की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही तर्क दे रहे हैं कि नहरों में जरूरत के समय पानी नहीं आता है। वे लोग निजी पंपिंग सेट के जरिए अपने खेतों की सिंचाई करते हैं। नाली निर्माण की जरूरत नहीं होने की बात कर रहे हैं। काम नहीं हो पाने की वजह से सत्र की समाप्ति पर शासन से मिले ढाई करोड़ शासन को लौटाना पड़ गया है। समस्या की बाबत उच्चाधिकारियों को अवगत कराया दिया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

कोट
नहरों से नाली निर्माण करा कर किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने की योजना बेहद महत्वाकांक्षी है। यह सच है कि इसमें नाली निर्माण के लिए किसानों से ली जाने वाली जमीन का मुआवजा दिए जाने का प्रावधान नहीं है। कार्यदायी संस्था को चाहिए कि वह किसानों को योजना के लाभ के बारे में ठीक से समझाए। वैसे कार्यदायी संस्था की मदद के लिए अधिकारियों को भेजकर किसानों से वार्ता कराई जाएगी। पूरी कोशिश होगी कि किसान योजना को समझ लें, ताकि इस दिशा में काम हो सके और किसानों को सिंचाई की सुविधा मिल सके।
- सुरेंद्र नाथ श्रीवास्तव, सीडीओ
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें