संतकबीरनगर। सहालग के सीजन में पनीर की खपत तीन गुना बढ़ गई है। हालांकि उत्पादन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। ऐसे में डिमांड के आधार पर आपूर्ति करने और चार गुना मुनाफा कमाने की लालच में मिलावट की जा रही है।
जनवरी में सहालग के समय खाद्य विभाग ने पनीर और दूध के आठ नमूने लिए थे, ये सभी अधोमानक मिले हैं। रिपोर्ट में पनीर से फैट गायब है और भैंस के दूध में मिल्क पाउडर की मिलावट मिली है। खाद्य विभाग एडीएम न्यायालय में वाद दायर करने की तैयारी में है।
बता दें कि खाद्य टीम ने जनवरी और फरवरी में सहालग के समय नमूने पनीर और दूध के आठ लिए थे। इसमें से पनीर के तीन नमूने फेल हुए हैं। पनीर से फैट ही गायब मिला है। यह पनीर पाउडर और पाम ऑयल से तैयार किया गया था, यह खाद्य विभाग की रिपोर्ट बता रही है। जबकि एक किलोग्राम शुद्ध पनीर में 175 ग्राम फैट होता है।
वहीं दूध में अगर मिलावट भी है तो 150 ग्राम फैट होना जरूरी है। इसी तरह दूध के पांच नमूने भी फेल हुए है। इसमें मिल्क पाउडर की मिलावट मिली है। वैसे जिले में सामान्य दिनों में 40 से 50 क्विंटल पनीर की खपत होती है। लेकिन सहालग में खपत 300 क्विंटल तक पहुंच जाती है। लोकल दुकानदार 220 रुपये किलो पनीर बेच रहे हैं, जिसमें मिलावट की आशंंका है।
वहीं दुकानों पर पनीर 400 रुपये किलो बिक रहा है। ऐसे में धंधेबाज पनीर में मिलावट कर लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं।