बाजार में दुकान पर बिक रहा पेड़ा-संवाद
उद्योग विभाग ने शासन को भेजी सूची, स्वीकृति का इंतजार
बजट में ‘एक जिला-एक व्यंजन’ योजना को मिला विशेष प्रावधान
पुनीत कुमार मिश्र
संतकबीरनगर। संत कबीर की पावन धरती अब अपनी आध्यात्मिक पहचान के साथ-साथ स्वाद की मिठास के लिए भी नई पहचान बनाने की ओर अग्रसर है। शासन की ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना की तर्ज पर शुरू की गई ‘एक जिला-एक व्यंजन’ (ओडीओसी) योजना में संतकबीरनगर से पारंपरिक पेड़ा को शामिल करने का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया गया है। अब स्वीकृति का इंतजार है। उद्योग विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मंजूरी मिलते ही योजना को धरातल पर लागू किया जाएगा, जिससे स्थानीय मिठाई व्यवसाय को नया संबल मिलेगा।
बजट में विशेष प्रावधान, स्थानीय उत्पाद को मिलेगा बढ़ावा : शासन ने ‘एक जिला-एक व्यंजन’ योजना को इस वर्ष के बजट में भी शामिल किया है। इसका उद्देश्य प्रत्येक जिले के विशिष्ट और लोकप्रिय व्यंजन को पहचान दिलाकर उसे संगठित रूप से विकसित करना है। संतकबीरनगर में खोआ और दूध से तैयार पारंपरिक पेड़ा व्यापक रूप से लोकप्रिय है। शहर के अलावा बघौली, बखिरा, मेंहदावल, सेमरियावां, बेलहर, हैंसर, नाथनगर, महुली और पौली क्षेत्र में इसकी विशेष मांग है। छोटे और बड़े आकार में उपलब्ध यह पेड़ा स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वालों की भी पसंद बना हुआ है।
जीआई टैग और ब्रांडिंग की दिशा में पहल : प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद पेड़ा उत्पादन को सूक्ष्म एवं लघु उद्योग के तहत समाहित किया जाएगा। साथ ही जीआई टैग, एफएसएसएआई प्रमाणीकरण, आकर्षक पैकेजिंग और संगठित विपणन की दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे। इससे न केवल उत्पाद की गुणवत्ता सुनिश्चित होगी, बल्कि स्थानीय उद्यमियों को बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त भी मिलेगी।
दुकानदारों में उत्साह
मिठाई व्यवसायी विनोद यादव और धर्मेंद्र कुमार का कहना है कि ग्राहकों में पेड़े की मांग हमेशा बनी रहती है। यदि इसे ओडीओसी में शामिल किया जाता है, तो जिले के पेड़े को नई पहचान मिलेगी और कारोबार को भी मजबूती मिलेगी।
अधिकारी बोले
उपायुक्त उद्योग राजकुमार शर्मा ने बताया,
“विशेष स्थानीय व्यंजनों में पेड़ा सर्वाधिक लोकप्रिय है। इसकी सूची तैयार कर शासन को भेज दी गई है। स्वीकृति मिलते ही ओडीओसी योजना का क्रियान्वयन शुरू कर दिया जाएगा।”