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Sant Kabir Nagar News: अमर बलिदानी रामप्रीत की शौर्यगाथा बनी क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा

Sun, 25 Jan 2026 01:19 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
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अमर बलिदानी रामप्रीत चौरसिया की फोटो
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हरिहरपुर। अमर बलिदानी रामप्रीत चौरसिया की शहादत को इक्कीस साल बीत गए लेकिन आज भी उनकी जांबाजी के किस्से क्षेत्र के लोगों के जेहन में हैं। क्षेत्र के युवा अमर बलिदानी की शौर्य-गाथा सुनकर आज भी गर्व की अनुभूति करते हैं।
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रामप्रीत चौरसिया ने कश्मीर के पुलवामा में मुठभेड़ के दौरान तीन आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया था। आतंकियों की गोली लगने से वे घायल हो गए और इलाज के दौरान भारत माता का वीर सपूत चिर निद्रा में सो गया।

नाथनगर ब्लॉक के अलीनगर गांव निवासी रामप्रीत चौरसिया साल 1988 में बीएसएफ में कांस्टेबल के पद पर भर्तीं हुए थे। 2001 में कश्मीर के पुलवामा में बीएसएफ की 52वीं बटालियन में उन्हें तैनाती मिलीं थी। सितंबर 2003 में नरवानी सेक्टर के एक घर में दहशतगर्दों के छिपे होने का इनपुट रक्षा एजेंसियों को मिला।
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रिहायशी घर में छिपे आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन का जिम्मा जिस बटालियन को साौंपा गया था उसी बटालियन में रामप्रीत चौरसिया की भी तैनाती थी। नरवानी सेक्टर के जिस घर में आतंकी छिपे हुए थे उसे बीएसएफ के 52वीं बटालियन ने चारों और से घेर लिया। खुद को चारों ओर से घिरा देखकर दहशतगर्दों ने सेना पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी जिसमें बटालियन के एएसआई और कांस्टेबल घायल हो गए थे। साथियों के घायल हो जाने के बाद रामप्रीत चौरसिया ने खुद मोर्चा संभाला।
काफी देर तक चली मुठभेड़ में रामप्रीत चौरसिया ने घर में छिपे तीनों दहशतगर्दों को मौत की नींद सुला दिया। इस दौरान वे आतंकियों की गोली से घायल हो गए। अस्पताल में इलाज के दौरान देश का जांबाज सपूत रामप्रीत चौरसिया सदा के लिए मॉ भारती की गोद में सो गया। अमर बलिदानी के पैतृक गांव अलीनगर के समीप स्थित कठिनइया नदी के किनारे रामप्रीत चौरसिया की समाधि बनी हुई है। जहां राष्ट्रीय पर्व पर लोग उनकी शहादत को याद करते हैं। अमर बलिदानी रामप्रीत चौरसिया की शौर्य-गाथा क्षेत्र के युवाओं के लिए आज भी प्रेरणास्रोत है।
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- मरणोपरांत राष्ट्रपति पदक से हुए थे सम्मानित

शहीद रामप्रीत चौरसिया को उनके अदम्य साहस और बहादुरी के लिए 2005 में मरणोपरांत राष्ट्रपति पुलिस पदक फॉर गैलेंट्री अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। जिस समय रामप्रीत चौरसिया शहीद हुए थे। उस समय वे अपने पीछे माता-पिता, पत्ली और चार बचे छोड़ गए थे जिसमें उनका बडा बेटा विनय कमार चौरसिया महज 13 साल का था।

अमर बलिदानी रामप्रीत चौरसिया की फोटो

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