फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sant Kabir Nagar News: किस्त का दबाव ऐसा कि घर छोड़ गईं महिलाएं

Fri, 28 Mar 2025 11:17 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
विज्ञापन
विज्ञापन
बेलहर। सांथा और बेलहर क्षेत्र में माइक्रो फाइनेंस कंपनियों ने अपना पूरा जाल फैला लिया है। महिलाओं ने समूह बनाकर इनसे कर्ज तो ले लिया, लेकिन जब किस्त बढ़ती गई और एजेंटों ने दबाव बनाना शुरू किया तो तीन महिलाएं घर छोड़ने पर विवश हो गईं। जो घर नहीं छोड़ सकती हैं, वह महिलाएं किसी तरह से पेट काटकर अपनी किस्त जमा कर रही हैं।
विज्ञापन


इस क्षेत्र में कार्यरत माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के अभिकर्ता महिलाओं को अपने झांसे में फंसाते जा रहे हैं। वर्तमान समय में क्षेत्र में दर्जनों माइक्रो फाइनेंस कंपनियां चल रही हैं। महिलाओं को पहले बताया जाता है कि वह दस लोगों के साथ आधार कार्ड व पैन कार्ड लेकर आएं और समूह बना लें। इसके बाद उन्हें आसान किस्तों का झांसा देकर लोन दे दिया जाएगा।

लोन की गई रकम में से पहले ही तीन हजार से लेकर पांच हजार रुपये प्रोसेसिंग फीस और बीमा के नाम पर काट लिया जाता है। इसके बाद बचा पैसा उनके खाते में क्रेडिट किया जाता है। यही नहीं जब मासिक किस्त बनाई जाती हैं तो लोन की पूरी रकम पर बनाई जाती है। लोन की रकम का पहले ही 10 प्रतिशत गंवाने के बाद प्रतिमाह या सप्ताह के आधार पर ईएमआई बनता है।
विज्ञापन


अगर इस ईएमआई को जोड़ा जाए तो महिलाओं को मूलधन के डेढ़ से लेकर ढाई गुना धन जमा करना पड़ता है। अगर एक किस्त भी रूक गया तो कंपनी का एजेंट दरवाजे पर आकर दबाव बनाने लगते हैं।



अंजनी, किसलावती और लक्ष्मी ने छोड़ा घर, एजेंट अब सास और देवर पर बना रहे दबाव

साथां की रहने वाली अंजनी पत्नी ठाकुर ने माइक्रो फाइनेंस कंपनी से लोन लिया था। कुछ दिनों तक तो कंपनी की किस्त जमा किया। इसके बाद जब उनके पास किस्त देने के लिए पैसा नहीं बचा तो वह दो साल से घर में ताला बंद करके परिवार के साथ कहीं अन्यत्र चली गई हैं। उनके पड़ोसी गनेश बताते हैं कि उन्होंने पांच कंपनियों से लोन लिया था। एजेंट अब भी आते रहते हैं।

-

सांथा की रहने वाली किसलवाती देवी ने पांच कंपनियों में लोन लिया था। वह पहले तो किस्त जमा करती रहीं, लेकिन जब घर की आर्थिक स्थिति किस्त भरने लायक नहीं बची तो वह छह माह पहले घर छोड़कर पूरे परिवार के साथ कहीं चली गईं। एजेंट आते हैं और उनके सास और देवर के ऊपर दबाव बनाते हैं। लेकिन वह लोग कहते हैं कि जब उन लोगों ने लोन लिया ही नहीं तो आखिर क्यों दें।



सांथा की रहने वाली लक्ष्मी देवी के पड़ोसी प्रेम बताते हैं कि उनका पांच कंपनियों में लोन चल रहा था। वह सभी एजेंटों को किस्त का पैसा भी देती रहती थी। बाद में उनके पास किस्त देने के पैसे ही नहीं बचे। पैसा आने के सभी रास्ते बंद हो गए। इसके बाद वह पूरे परिवार के साथ छह माह पहले घर छोड़कर चली गईं। किसी को पता नहीं है कि वह कहां गईं।



एजेंटों के भय से दर्जनभर गांवों की महिलाएं परेशान

सांथा क्षेत्र के निधुरी, सांथा, गनवरिया, धोबहा, बेलवा मिश्रा, बेलहर, अमरगढ़, लोहरसन, हसनी, हसवापार, फुलवरिया, गोपालपुर, रमवापुर मिश्र, रमवापुर सरकारी, गोइठहां समेत अन्य गांवों में माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के एजेंट बराबर चक्कर लगाते रहते हैं। कारण यह है कि इन क्षेत्रों की महिलाओं ने छोटे-छोटे समूह बनाकर लोन लिया है। यही नहीं तमाम महिलाएं लोन भी ले रही हैं। जिन महिलाओं ने लोन लिया है। उनके परिवार के लोग परेशान रहते हैं।

-

बदहाली के दौर से गुजर रही हैं ये महिलाएं



जबसे लोन लिया तबसे आ गई भुखमरी : सुनीता

सांथा निवासी सुनीता बताती हैं कि उन्होंने आठ कंपनियों से लोन लिया था। सभी की किस्त समय पर जमा करती थीं। बच्चा बीमार होने से पैसा जमा नहीं हो पा रहा है। एजेंट घर आकर दबाव बनाते हैं। पति की तबीयत भी खराब रहती है। लगभग दो लाख रुपया और जमा करना है। जबसे लोन लिया, तबसे भुखमरी की स्थिति आ गई है।



फाइल खर्च के नाम पर काट लेते हैं रकम : तसमीन

सांथा की तसमीन बताती हैं कि चार कंपनियों का लोन चल रहा है। जीवन बीमा और फाइल खर्चा के नाम पर अच्छी खासी रकम पहले ही ली जा चुकी है। बच्चे अभी छोटे हैं, पति भी परेशान रहते हैं। एक लाख रुपये का लोन अभी और जमा करना है। सप्ताह, 15 दिन और महीने की किस्त दे रही हूं, किसी तरह से जीवन की गाड़ी चल रही है।

-

अब जीवन में कभी नहीं लूंगी लोन : सबीना

सांथा की सबीना खातून ने बताया की लोन लेकर के बड़ा पछतावा हो रहा है। अब जोड़ने पर पता चलता है कि बहुत ही ज्यादा सूद देना पड़ रहा है। किसी महीने में किस्त नहीं तैयार होती है तो कंपनी के लोग घर पर ही डेरा जमा लेते हैं। 50 हजार का लोन और बचा है। किसी तरह से अगर जमा हो जाए तो फिर कभी लोन नहीं लूंगी ।

-

पति का इलाज कराएं या जमा करें लोन : आसमां

सांथा की असमा खातून बताती है कि तीन कंपनियों में लोन चल रहा। इसी बीच पति को फालिज मार दिया है। पति का इलाज कराने में काफी पैसा खर्च हो रहा है। एजेंट मजबूरी समझते ही नहीं हैं। वह कहते हैं कि मजबूरी चाहे जो भी हो, उनको तो किस्त का पैसा चाहिए। अब पति का इलाज करवाएं या फिर लोन की किस्त जमा करें।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें