संतकबीरनगर। पुरातत्व विभाग को सेमरियावां ब्लॉक के लहुरादेवा में खोदाई के दौरान खेती करने के अवशेष मिले थे। इनमें अनाज के भंडारण के लिए डेहरियां, करीब आठ हजार साल पहले धान की खेती के अवशेष मिले हैं। इसे देखते हुए डीएम ने धरोहर के रूप में विकसित करने की योजना तैयार की थी। यहां पर म्यूजियम और गेस्ट हाउस बनाने के लिए डीएम ने 11 करोड़ रुपये का प्रस्ताव छह माह शासन को भेजा था, लेकिन अभी तक इस पर अमल नहीं हो सका है। जिसकी वजह से योजना अधर में लटकी हुई है।
सेमरियावां ब्लॉक के ऐतिहासिक स्थल लहुरादेवा को पर्यटन के दृष्टि से विकसित करने के लिए डीएम ने पहल की थी। वर्षों से उपेक्षित पड़े इस स्थल के विकास के लिए कार्ययोजना तैयार की गई। इनमें यहां की विरासत को संरक्षित करने के साथ ही आधुनिकता और अन्य सुविधाओं से लैस करने काम किया जाना है। विकास के लिए जो कार्ययोजना बनी है, उसमें म्यूजियम और पर्यटकों के ठहरने के लिए एक गेस्ट हाउस बनाया जाना है। इसके साथ ही चहारदीवारी बनाया जाना था।
इस पर कुल 11 करोड़ रुपये खर्च होने थे। इसके साथ ही समय माई के टीला को भी विकसित किया जाना है। ताकि यहां पर आने वाले पर्यटक इस मंदिर को देखे और आकर्षित हाे सके। इसके साथ ही आठ हजार साल पहले मिले धान के अवशेष को म्यूजियम में देख सके। फिलहाल प्रस्ताव अभी शासन में लंबित है। जिसकी वजह से अभी तक इस ओर कोई कदम नहीं उठाया जा सका है।
कोट
लहुरादेवा को विकसित करने की योजना के तहत प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति का इंतजार है। इसे लिए फिर से रिमाइंडर भेजा गया है। उम्मीद है कि जल्द ही इसकी स्वीकृति मिल जाएगी। जिसके बाद इस पर कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
-महेंद्र सिंह तंवर, डीएम