महुली। क्षेत्र के मुखलिसपुर में स्थित ठाकुरद्वारा रामजानकी मंदिर के महंत को लेकर करीब तीन महीने से विवाद चल रहा था। सोमवार को सुतीक्ष्ण मुनि को महंत की गद्दी पर बैठाने के बाद मामले का पटाक्षेप हो गया। मंगलवार को सुबह मंदिर में आरती और प्रसाद वितरण का कार्य शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
मंदिर की महिला साध्वी रिंकी दास पूर्व महंत बाबा कमल दास की सेवा में 12 वर्षों से लगी रहीं। रिंकी दास ने बताया कि हमने 12 वर्षों से बाबा कमल दास की सेवा की और उनका इलाज खलीलाबाद से लेकर गोरखपुर तक करवाया और उनकी मृत्यु तक उनकी सेवा की। कुछ स्थानीय लोगों के हस्तक्षेप के कारण उनको महंत नहीं बनने दिया गया। तीन महीने पहले कुछ स्थानीय लोगों द्वारा थाना महुली और एसडीएम धनघटा से शिकायत की गई कि रिंकी दास ने मंदिर के गर्भगृह में ताला जड़ दिया है।
सूचना पर पहुंची महुली पुलिस और तहसील प्रशासन ने रिंकी दास को समझा-बुझाकर ताला खुलवाया था। समय के साथ विवाद बढ़ता गया और कस्बे के कुछ संभ्रांत लोगों ने इस मामले को अयोध्या में स्थित रानोपाली में रखा, जिसके बाद ट्रस्ट के लोगों ने सुतीक्ष्ण मुनि को यहां का महंत घोषित किया। सोमवार को उनकी ताजपोशी की गई। इसी बीच रिंकी दास मंच पर पहुंच कर अपनी बात लोगों के बीच रखने के लिए माइक पकड़ा तो स्थानीय लोगों ने उनका विरोध करते हुए माइक बंद कर दिया और जब बिना माइक के अपनी बात लोगों से करनी चाही तो लोगों ने तेजी के साथ नारा लगा कर उनकी आवाज दबा दी। इससे नाराज रिंकी दास ने भाग कर अपने आपको मंदिर के गर्भगृह में बंद कर लिया।
महुली थानाध्यक्ष दुर्गेश कुमार पांडेय और तहसीलदार धनघटा रामजी ने समझाया तब रिंकी दास बाहर आईं। नवनियुक्त महंत से प्रशासन की टीम ने बात की तो उन्होंने कहा कि हमें कोई आपत्ति नहीं है। यह मंदिर है यहां रह कर भगवान की पूजा अर्चना कर सकती हैं।