मेंहदावल। मेंहदावल विकास खंड के डुमरिया बाबू गांव में नसबंदी कराने पर गांव के 70 लोगों को जमीन दी गई थी। लेकिन अब इस पट्टे को यह कहकर निरस्त कर दिया गया कि वह वर्ग तीन की जमीन है, जिसको पट़्टा नहीं किया जा सकता है। इस बात को लेकर गांव के लोगों में आक्रोश का माहौल देखा जा रहा है।
मेंहदावल विकासखंड के डुमरिया बाबू गांव में वर्ष 1986 में परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत गांव में कैंप लगा। लोगों ने बढ़-चढ़कर नसबंदी कराया। तत्कालीन जनपद बस्ती का यह पहला गांव था जहां के लोगों ने परिवार नियोजन के कार्यक्रम में जोरदार सहयोग किया। तत्कालीन डीएम ने गांव के ग्राम प्रधान को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया। नसबंदी के एवज में गांव के लोगों को तत्कालीन एसडीएम ने जमीन का पट्टा भी किया।
वर्तमान एसडीएम मेंहदावल ने नसबंदी के दौरान मिले पट्टे को निरस्त कर दिया। जिससे लोग मायूस हैं। प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर प्रशासन भी नसबंदी करने वाले परिवार के साथ धोखा कर रही है। जमीन नहीं देना था तो नहीं देते, आखिर जमीन देकर 40 साल बाद छीनने की प्रक्रिया क्यों की गई।
मेंहदावल विकासखंड क्षेत्र के डुमरिया बाबू गांव निवासी जय प्रकाश यादव ने बताया कि मेरे गांव में वर्ष 1986 में परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत गांव में कैंप लगा। तत्कालीन ग्राम प्रधान राम लखन से उस समय बस्ती जनपद के खलीलाबाद तहसील के एसडीएम आरसीपी सिंह ने ग्राम प्रधान से सहयोग मांगा। इसके तहत ग्राम प्रधान ने परिवार नियोजन कार्यक्रम का भरपूर सहयोग किया और लोगों ने नसबंदी कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इसका नतीजा यह रहा कि मेरा गांव बस्ती जनपद में नसबंदी कार्यक्रम में नंबर एक पर रहा।
इस पर तत्कालीन एसडीएम ने नसबंदी करने वाले परिवार के लोगों को नदी की पेट की भूमि आवंटित की। गांव के लोगों को किसान बही तथा इंतखाब तथा खसरा भी लोगों को समय आने पर मिल गया। लेकिन काफी वर्ष बाद यह ज्ञात हुआ कि जो जमीन प्रशासन ने नसबंदी करने वाले परिवार के लोगों को पट्टा किया है वह वर्ग 3 की भूमि है। जो राप्ती नदी की भूमि है। इसको निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू हो गई। इस पर पट्टा धारकों ने कायमी दिया था। वर्तमान समय में एसडीएम संजीव कुमार राय ने पट्टा धारकों के कायमी को निरस्त कर दिया। जिसके कारण नसबंदी करने वाले परिवार को मिली भूमि मूल खाते में चली गई। ऐसे में नसबंदी करने वाले परिवारों का कहना है कि उनके साथ प्रशासन ने धोखा किया। प्रशासन की दोहरी नीति का खामियाजा पट्टा धारकों के परिवार को भुगतना पड़ रहा है।
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क्या होती है वर्ग तीन की जमीन
लेखपाल जंगबहादुर सिंह बताते हैं कि वर्ग तीन और चार की जमीन सरकारी और सुरक्षित जमीन होती है। इसमें परती और बंजर छोड़कर चारागाह, तालाब, भीटा, हड़ोहर, खलिहान, खाद गड्ढा, नदी, वन आदि की जमीन आती है। पहले सुरक्षित जमीन को कृषि करने योग्य बताकर पट्टा कर दिया जाता था। लेकिन वह नियम से वैध नहीं है। वर्तमान समय में नियम यह है कि वर्ग तीन की जमीनों का पट्टा मूल खाते में भेज दिया जाए।
कोट
जो भूमि पट्टा की गई है। वह भूमि श्रेणी 3 की है जो राप्ती नदी ड्रेनेज खंड का हिस्सा है। उक्त पट्टा पूरी तरह से गलत हुआ है। इसके कारण कायमी को निरस्त किया गया। वह भूमि फिर से खाता में वापस करने का आदेश पारित किया गया है।
-संजीव कुमार राय, एसडीएम, मेंहदावल