संतकबीर की स्थली होने की वजह से मगहर रेलवे स्टेशन का महत्व बढ़ जाता है, क्योकि कबीर के दर्शन के लिए देश ही नहीं विदेशों से पर्यटक और श्रद्धालुओं का बराबर आना जाना रहता है। पूर्वोत्तर रेलवे ने भी इसे आदर्श रेलवे स्टेशन की श्रेणी में रखा है और रेलवे के मानचित्र पर भी मगहर रेलवे स्टेशन दर्शित है। यहां आने के लिये एक मात्र साधन रेलवे ही है। इसके बाद भी स्टेशन पर सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। न तो पेयजल व्यवस्था ठीक है अैर न ही प्रकाश का ही मुकम्मल इंतजाम है।
नगर पंचायत मगहर की आबादी लगभग 40 हजार है। इसका कुछ हिस्सा रेलवे स्टेशन से दक्षिण में बसता है, जो इस्लाम नगर के नाम से जाना जाता है। जहां आने-जाने का कोई रास्ता नहीं है। लोगों को रेलवे लाईन पार करके जाना पड़ता है। इसके कारण कई लोगों की ट्रेन की चपेट में आ जाने से मृत्यु भी हो चुकी है। त्रिलोकीनाथ वर्मा, फारूक अंसारी, इनामुक हक, राजेश वर्मा, मोहम्मद नईम, अफरोज खान, मेंहदी हसन, लालचंद यादव, छेदी अली, दिलीप गौड़ आदि का कहना है कि बाहर से आने के लिये रेलवे ही एक मात्र साधन है। रेलवे स्टेशन साफ सुथरा तो रहता है लेकिन पानी और बिजली की व्यवस्था अक्सर खराब रहती है। यहां पर अप और डाउन दो प्लेट फार्म हैं। इन दोनों को जोड़ने के लिए ओवर ब्रिज का निर्माण तो करा दिया गया है ,लेकिन रेलवे स्टेशन के दक्षिण आबादी में जाने और स्टेशन पर आने और नगर को जोड़ने के लिए रेलवे के द्वारा ओवर ब्रिज का निर्माण नहीं कराया गया है। ओवर ब्रिज के लिए कई बार रेलवे के अधिकारियों से मांग की गयी लेकिन समस्या का हल नहीं हुआ है। गर्मी का मौसम है, पेयजल की व्यव्स्था तो की गयी है लेकिन अक्सर इनकी टोटियों में पानी नदारत रहता है। प्रकाश व्यवस्था भी लुंज पुंज रहती है। इससे मुसाफिरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। स्टेशन मास्टर विभाष चंद ने बताया कि बिजली की समस्या के कारण पेजयल की व्यवस्था में दिक्कत हुई। ठंडा पेय जल मुसाफिरों के लिए हर समय उपलब्ध रहता है। सुरक्षा की दृष्टि से शाम होते ही आरपीएफ के जवान पूरी रात मुस्तैद रहते है। जहां तक ओवर ब्रिज की बात,तो वह आला अधिकारियों का मामला है। टिकट की खिड़की अपने नियत समय से खुलती और बंद होती है। रिजर्वेशन खिड़की आठ बजे सुबह से चार बजे शाम तक खुली रहती है।