संतकबीरनगर। सहालग का समय चल रहा है। बरात में कानफोड़ू डीजे के शोर से लोग बीमार हो रहे हैं। हृदय के मरीजों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है। वहीं शादी-विवाह में डीजे मारपीट का भी कारण बन रहा है। तो तेज आवाज के चलते आसपास के घरों में भी कंपन हो रहा है।
गाइड लाइन के अनुसार 45 डिसेबल से ज्यादा डीजे नहीं बजाया जा सकता है लेकिन संचालक 200 डिसेबल तक डीजे बजा रहे हैं। इसके शोर से कान की समस्या उत्पन्न हो रही है। जिला अस्पताल के ईएनटी विभाग में प्रतिदिन आठ से 10 मरीज कान की समस्या को लेकर पहुंच रहे हैं, जिन्हें सुनने में दिक्कत आ रही है और कान से पानी भी आ रहा है। सहालग में डीजे का चलन बढ़ गया है। लोगों को अंदाजा नहीं है कि जो रकम डीजे पर खर्च कर रहे हैं, वही डीजे बीमारी के साथ जेब भी खाली कर रहा है।
बरात ले जाते समय द्वारपूजा तक वाहनों पर बड़े-बड़े डीजे बॉक्स रखकर तेज ध्वनि में बजाया जा रहा है। साथ ही मैरिज हाल में देर रात तक डीजे बजाए जा रहे हैं, जिसके शोर के चलते आसपास रहने वाले लोग ही नहीं बराती और घराती भी परेशान हैं। शहर में रहने वाले लोग डीजे के शोर के चलते ठीक से सो भी नहीं पा रहे हैं और बीमार हो रहे हैं। शनिवार को मेंहदावल बाईपास के पास कुछ युवकों बरात में डांस कर रहे थे। उन्होंने डीजे संचालक को तेज आवाज में डीजे बजाने के लिए कहा तो वह नहीं बजाया। जिसके बाद वहां पर युवकों ने डीजे संचालक के साथ हाथापाई कर दी, लेकिन कुछ लोगों ने समझा बुझाकर मामला शांत कराया।
डीजे बजाने को लेकर नवंबर में हुई थी मारपीट
27 नवंबर को दुधारा क्षेत्र के वाकरगंज में बरात निकली थी। रात नौ बजे के करीब बरात राजू के दरवाजे से जा रही थी। डीजे की तेज आवाज को धीमा करने के लिए राजू के कहने पर बरातियों ने उसे मारपीट कर घायल कर दिया। बचाव में आए परिजनों को भी मारे-पीटे। इसमें राजू की तहरीर पर पुलिस ने चार लोगों पर केस दर्ज किया है। वही दूसरे पक्ष के जोखू की तहरीर पर भी चार पर केस दर्ज हुआ था।
60 डेसिबल तक आवाज सहन करने की कान की क्षमता
डीजे पर ध्वनि की सीमा निर्धारित है। इसे अधिकतम 45 डेसिबल तक बजाया जा सकता है, लेकिन डीजे संचालक सौ से दो सौ डेसिबल तक डीजे चलाते हैं और यह ध्वनि व्यक्ति के सहन शक्ति से बाहर हो जाती है। नाक कान गला रोग विशेषज्ञ डॉ. एमके सिंह के मुताबिक कान की अधिकतम क्षमता 60 डेसिबल तक आवाज सहन करने की होती है। यह निरंतर क्रम में नहीं होनी चाहिए। लंबे समय तक ध्वनि से कान में दर्द, बहरापन, दिमाग में हलचल, सीने में दर्द, पल्स का बढ़ना, शरीर में कंपन होना जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
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साउंड और समय का मानक निर्धारित
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार ध्वनि व समय संबंधी तय हैं लेकिन डीजे संचालक इस पर ध्यान देते। दीवानी न्यायालय के जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी विशाल श्रीवास्तव बताते हैं कि ध्वनि प्रदूषण करने पर सजा का प्रावधान है। लोग निर्धारित सीमा से अधिक ध्वनि वाले म्युजिक सिस्टम न बजाएं। रात्रि दस बजे के बाद डीजे साउंड सिस्टम बंद होने चाहिए लेकिन इन नियमों का पालन नहीं होता।
कोट
डीजे बजाने का नियम निर्धारित है। कितना डिसेबल होना चाहिए वह भी निर्धारित है। सभी एसडीएम, सीओ और एसओ को निर्देश दिया गया है कि लोगों को जागरूक कर इसका पालन कराएं। जिससे आम लोग इससे परेशान न हो।
-महेंद्र सिंह तंवर, डीएम