जिले में सीएचसी और पीएचसी पर हाईटेक जांच के लिए 10 हेल्थ एटीएम मशीन नौ माह पूर्व आई। इस मशीन से 59 प्रकार की जांच होनी थी, लेकिन हाल यह है कि मशीन सीएचसी और पीएचसी के कमरों की शोभा बढ़ा रही है। इन्हें अभी तक स्टाॅल तक नहीं किया जा सका है, ऐसे में एक करोड़ कीमत की मशीन बेकार पड़ी हुई है।
मरीजों को नि:शुल्क व हाईटेक जांच के लिए सरकार ने हेल्थ एटीएम हर पीएचसी व सीएचसी पर भेजने की योजना तैयार की थी। इसके तहत जिले में 10 हेल्थ एटीएम आए। इसमें सीएचसी खलीलाबाद पर एक, सीएचसी सांथा पर एक, पीएचसी रमवापुर सरकारी पर एक, पीएचसी मेंहदूपार में एक, पीएचसी रोसयाबाजार में एक, पीएचसी शनिचरा में एक, पीएचसी बघौली में दो, पीएचसी परसाझकरिया में एक और पीएचसी बखिरा में एक मशीन लगाई गई। एक हेल्थ मशीन की कीमत 10 से 12 लाख के करीब बताई जा रही है। इस मशीन से मरीज के शरीर की पूरी स्क्रीनिंग होनी है। मरीज को क्या दिक्कत है, यह मशीन से जरिए पता चल जाता है। यही जांच बाहर कराने पर मरीज को औने-पौने दाम देने पड़ रहे हैं। मशीन आने बाद इसे स्टॉल नहीं किया जा सका।
मशीन अस्पताल के कमरों में धूल फांक रही है। मशीनों के स्टॉल न होने के चलते लोग जांच से वंचित हो रहे हैं, इसके साथ ही कई लोगों को इस मशीन के बारे में पता भी नहीं है। हालांकि विभाग का दावा है कि सांथा, रमवापुर सरकारी, मेंहदूपार, रोसयाबाजार और शनिचरा में मशीन को स्टॉल कराया गया है, पर हाल यह कि यहां पर मशीन अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। यहां तक इसे चलाने के लिए टेक्नीशियन भी नहीं है।
सीएचसी सेमरियावां और बेलहर में नहीं होती है खून की जांच
हेल्थ एटीएम की बात कौन कहे, सीएचसी सेमरियावां और बेलहर में अभी तक साधारण जांच तक नहीं हो पा रही है। सेमरियावां में मशीन है, लेकिन उसका केमिकल समाप्त हुए छह माह से अधिक हो गए, यहां जांच ठप है। यही हाल सीएचसी बेलहर का भी है, वहां भी जांच ठप है।
ये जांचे होनी हैं
हेल्थ एटीएम से शरीर की स्क्रीनिंग होती है। इसमें ऊंचाई, वजन, बीएमआई, बीमएआर, हाईड्रेशन, बॉडी मास, शरीर में वसा का अनुपात, बीपी, पल्स रेट, ऑक्सीजन, तापमान, ग्लूकोज, हीमोग्लोबिन, लिपिट प्रोफाइल, डेंगू, मलेरिया, यूरिन, गर्भावस्था जांच, टाइफाइड, टीएलसी, डीएलसी, ब्लड यूनिट काउंट समेत कुल 59 प्रकार की जांच शामिल है।
हेल्थ एटीएम को स्टॉल कराया जा रहा है, पांच जगहों पर स्टॉल कराया गया है, अगर वह संचालित नहीं हो रहे हैं तो कारणों का पता लगाया जाएगा। जहां पर भी मशीन लगी है, सभी शुरू कराए जाएंगे ताकि मरीजों को इसका लाभ मिल सकें और इसका प्रचार-प्रसार हो सकें।
-डॉ. रामानुज कन्नौजिया, सीएमओ