सांथा। अधिक पैदावार के लिए गेहूं की बुआई नवंबर में कर दी जानी चाहिए। गेहूं की समय से बुआई के लिए स्मार्ट सीडर सर्वोत्तम उपाय है। स्मार्ट सीडर से धान की फसल की कटाई के बाद पराली को बिना जलाए गेहूं की बुआई की जा सकती है।
मेंहदावल के परसा माफी में इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट (इरी) के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र वाराणसी व महायोगी गोरखनाथ कृषि विश्वविद्यालय गोरखपुर की ओर से गेहूं की बुआई कराई जा रही है। इरी वाराणसी के वैज्ञानिक डॉ. अजय पुंडीर ने बताया की इस तकनीक से गेहूं की अगेती बुआई बिना पराली जलाए आसानी से की जा सकती है। गेहूं की अधिक उपज के लिए अति आवश्यक हैं। उन्होंने बताया कि धान गेहूं फसल प्रणाली में गेहूं की उपज बढ़ाने के लिए गेहूं की बुआई 25 नवंबर से पहले कर देनी चाहिए।
महायोगी गोरखनाथ कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. विवेक प्रताप सिंह ने कहा कि धान व गेहूं की बुआई में जीरो टिलेज विधि अपनाने से उपज में वृद्धि होती है। साथ ही खर्च में कमी तथा ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन में भी कमी आती है। इस दौरान कृषक अंगद चौधरी, संजय कुमार, रामकेश, चैतू, दिनेश, रमेश कुमार, महेंद्र रामकेश आदि उपस्थित रहे।
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सीधी बुआई से घटती है लागत
वाराणसी केंद्र के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह ने बताया कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर समेत 8 जनपदों में धान की सीधी बुआई व गेहूं की अगेती बुआई कराई गई है। इसमें जुताई नहीं होती है। पूर्व में धान की सीधी बुआई के परिणाम उत्साहवर्धक रहे हैं।