हरिहरपुर स्थित पूर्व चेयरमैन बृजेश पाल के आवास पर पसरा सन्नाटा-संवाद
हरिहरपुर। हाईकोर्ट के द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद नगर पंचायत हरिहरपुर के पहले चेयरमैन रहे बृजेश पाल के घर पर बुधवार को सन्नाटा पसरा हुआ था। इस फैसले के बाद उनका सियासी कॅरिअर भी संकट में घिरा दिखाई पड़ रहा है। वहीं उनके राजनीतिक विरोधियों की चुनौतियां भी खत्म हो गई हैं।
सरकार चाहे किसी की रही हो, नगर पंचायत हरिहरपुर के लोगों का एक वर्ग हमेशा उनके समर्थन में रहता है। नगर पंचायत हरिहरपुर के पहले चेयरमैन चुने जाने के बाद शुरू हुआ बृजेश पाल का राजनीतिक कॅरिअर नगर के सियासी महकमे में हमेशा असरदार रहा है।
नगर पंचायत अध्यक्ष पद की सीट भले ही आरक्षित रही हो लेकिन आम जनमानस का एक धड़ा उनके समर्थन में खड़ा रहता है। हरिहरपुर के नगर पंचायत बनने की स्वीकृति के बाद 1988 में हुए पहले चुनाव में बृजेश पाल ने जीत दर्ज करते हुए नगर पंचायत अध्यक्ष पद की कुर्सी संभाली। 1993 तक चेयरमैन रहे बृजेश पाल ने नगर को विकास की राह दिखाई। नगर पंचायत अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने नगर के चहुंमुखी विकास का खाका खींचा।
उसके बाद हुए नगर पंचायत के चुनाव में उनके समर्थित प्रत्याशी स्वर्गीय बनवारी लाल और जगन्नाथ ने चुनाव में जीत दर्ज की।
हर साल कवि रंगपाल की जयंती पर पाल सेवा संस्थान राष्ट्रीय एकीकरण और सांप्रदायिक सोहार्द के रूप में कार्यक्रम आयोजित कर कवि के सांस्कृतिक योगदान से लोगों को रूबरू कराते हैं। वहीं उनके विरोधी खेमे के वर्तमान चेयरमैन रवीन्द्र प्रताप शाही उर्फ पप्पू शाही की राजनीतिक चुनौतियां समाप्त हो गई हैं। संवाद