धनघटा। सरयू नदी के जलस्तर में लगातार गिरावट हो रही है लेकिन बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। तीन गांवों में अब भी बाढ़ का पानी है। रास्तों पर कीचड़ होने से लोगों का आवागमन मुश्किल हो गया है। पशुओं के चारे की समस्या भी बनी हुई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से राहत और जल निकासी की व्यवस्था कराने की मांग की है।
हाल ही में सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने से धनघटा तहसील क्षेत्र के 18 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए थे। कई लोगों के घरों के दरवाजे तक पानी पहुंच गया था। आवागमन के लिए रास्तों पर नाव का सहारा लेना पड़ रहा था। अब नदी के जलस्तर में तेजी से गिरावट शुरू हुई है। इससे 15 गांवों में घरों के दरवाजे से पानी हट गया है, लेकिन तीन गांवों में अब भी जलभराव की स्थिति बनी हुई है।
ग्राम प्रधान बालेंद्र कुमार, राजाराम, लालमन, लालचंद, दीनदयाल, ओमकार और सीताराम आदि ग्रामीणों ने बताया कि गांवों में जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं है। नदी का जलस्तर पूरी तरह नीचे जाने के बाद ही घरों के सामने जमा पानी धीरे-धीरे नदी की ओर जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान कमरिया घाट के पास जल निकासी के लिए बनी पुलिया को बंद कर दिया गया। इसके कारण बाढ़ का पानी उस रास्ते से नदी में नहीं पहुंच पा रहा है।
कीचड़ से होकर स्कूल जा रहे बच्चे
जल निकासी नहीं होने से चकदहा, भौवापार और गुनवतिया गांव में अब भी लोगों के घरों के सामने जलभराव है। रास्तों पर अब नाव चलने की स्थिति भी नहीं है। ग्रामीणों को कीचड़ से होकर आवागमन करना पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को हो रही है। बच्चे अक्सर कीचड़ में गिर जाते हैं, जिससे उनके कपड़े खराब हो जाते हैं। कई बच्चे स्कूल जाने के बजाय घर लौट आते हैं।
पशुओं के चारे का संकट
बाढ़ के कारण धान की फसल भी नष्ट हो गई है। खेतों में हरा चारा नहीं बचा है और पशुओं को खिलाने के लिए भूसे की भी कमी हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी का पानी कम होने के बावजूद बाढ़ का असर अभी खत्म नहीं हुआ है। लोगों ने प्रशासन से जल निकासी की व्यवस्था कराने के साथ पशुओं के लिए चारा और प्रभावित परिवारों को आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की है।