- जिले में कई हादसों के बाद भी जिम्मेदार नहीं ले रहे सबक
- कोई झुलस गया है तो किसी को गंभीर चोट लगी
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जनपद में बिजली के तार और ट्रांसफार्मर की मरम्मत के दौरान लाइनमैन सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। बिजली निगम के अधिकारियों की लापरवाही और दबाव के कारण तीन माह में तीन बिजली कर्मियों के साथ हादसे हो चुके हैं। दुर्घटना में कोई झुलस गया है तो किसी को गंभीर चोट लगी है। वहीं लाइनमैन उपकरण समय से न मिलने और जर्जर उपकरण के सहारे काम करने की बात बता रहे हैं। जबकि विभागीय अधिकारी कार्यदाई संस्था के माध्यम से सुरक्षा उपकरण मिलने का दावा कर रहे हैं।
इलेक्ट्रिसिटी नियम 1956 के तहत लाइनमैन को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा है। निगम के अधिकारी कहते हैं कि कर्मचारी फाल्ट सुधारने के दौरान सुरक्षा उपकरण और सेफ्टी बेल्ट नहीं पहनते हैं। पूरे जनपद में एक भी लाइनमैन हेलमेट पहने नजर नहीं आता है। वहीं दस्ताना और लाइफ जैकेट का उपयोग नहीं हो रहा है। जिससे फाल्ट ठीक करने वाले कर्मी जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं। वर्तमान में फाल्ट की समस्या है, जिसकी वजह से कर्मचारी अक्सर सीढ़ी लेकर दौड़ लगा रहे हैं। हादसा होने के बाद किसी का हाथ पैर टूट जाता है तो कोई गंभीर रूप से झुलसकर अस्पताल में पहुंचकर महीनों इलाज करता है।
केस एक
- तीन माह पूर्व 33 केवी औद्याेगिक क्षेत्र में काम करने के दौरान संविदाकर्मी श्रीकांत शुक्ल बिजली की चपेट में आकर घायल हो गया। साथियों ने उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया।
केस दो
हरिहरपुर उपकेंद्र के महुली फीडर पर लाइन सही करते समय 17 मई को संविदा कर्मी सुहेल अहमद बिजली की चपेट में आकर घायल हो गया, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया।
केस तीन
शहर के टाउन वन में बिजली ठीक करने के दौरान 27 मई को संविदाकर्मी बलराम यादव दो दिन पूर्व करंट की चपेट में आ गए। जिससे सीढ़ी से नीचे गिर गए और उन्हें काफी चोट आई। उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया।
खराब सुरक्षा उपकरण देने का आरोप
निगम कर्मचारियों को रखने वाली कार्यदाई संस्था पर घटिया उपकरण देने का आरोप लगता है। नाम न छापने की शर्त पर कर्मचारियों ने बताया कि कई साल पुराने जर्जर सीढ़ी से लाइन मरम्मत का काम चल रहा है। बार-बार कहने पर भी सीढ़ी नही मिल रहा है। जिस पर चढ़कर काम करना काफी मुश्किल है। इसके अलावा प्लायर, हैंड ग्लब्स, हेलमेट, अर्थचेन, रस्सा, पुलिया अन्य उपकरण भी काफी पुराने व जर्जर हैं। कुछ सामानों को लेने से कर्मचारियों ने इन्कार भी किया। इसके बाद भी उन्हें जबरदस्ती सामान थोप दिया गया। अधिकारी सामान को नहीं देखते हैं और उनसे जबरदस्ती लाइन पर काम करने के लिए दबाव बनाया जाता है।
सभी संविदा कर्मियों को सुरक्षा उपकरण कार्यदाई संस्था के माध्यम से देने की जानकारी मिली थी। इसकी समीक्षा की जाएगी। जो भी उपकरण नहीं होगा, उसका तत्काल व्यवस्था किया जाएगा। लाइन पर काम करने के दौरान सभी को सुरक्षा उपकरण पहनकर काम करने के लिए निर्देशित किया जाएगा।
- रमेश कुमार सिंह, अधीक्षण अभियंता