पूर्वांचल में कभी गन्ना की खेती किसानों की आर्थिक मजबूती का आधार हुआ करती थी। अब जिले के किसान इसी से मुंह मोड़ रहे हैं। स्थिति यह है कि पिछले साल की तुलना में इस बार गन्ना का क्षेत्रफल 1156 हेक्टेयर घट गया है। खलीलाबाद शुगर मिल की बंदी इसके पीछे मुख्य कारण है। अब जबकि विधान सभा चुनाव की तिथि घोषित हो गई है तो एक बार फिर शुगर मिल बंदी का मुद्दा गरमाने के आसार दिखने लगे हैं।
पिछले वर्ष गन्ने की बुआई की बात करें तो किसानों ने 2015-16 में 1215.767 हेक्टेयर में नई पौध की बुआई की गई थी, इसके साथ ही 2060.972 हेक्टेयर में पेड़ी गन्ना थी, लेकिन 2016-17 में मात्र 714.413 हेक्टेयर में गन्ना की नई पौध की बुआई हुई, जबकि पेड़ी गन्ना का क्षेत्रफल 1406.248 हेक्टेयर ही रह गया। इस प्रकार जिले में कुल गन्ना का क्षेत्रफल 1156 हेक्टेयर घट गया है। इससे स्पष्ट है कि किसानों का गन्ना की खेती से मोह भंग होने लगा है। इसके पीछे कारण यह है कि खलीलाबाद शुगर मिल अब बंद हो चुकी है। साथ ही किसानों को लागत के सापेक्ष गन्ना मूल्य भी कम मिल रहा है।
किसान कृष्ण चंद्र चौधरी, सुबाष चंद्र किसान आदि ने कहा कि शुगर मिल बंद होने के कारण गन्ना बेचने में दिक्कत है। पिछले वर्ष गन्ना का समर्थन मूल्य 280 रुपये प्रति क्विंतल था।
अब गन्ना का समर्थन मूल्य 305 रुपये ही है। उनका कहना है कि गन्ना की खेती में जो लागत आती है, उसके हिसाब से समर्थन मूल्य काफी कम है। साथ शुगर मिल बंद होने से पर्ची मिलने व गन्ना की बिक्री करने में भी दिक्कत आती है। ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक आशुतोष मधुकर स्वीकार करते हैं कि शुगर मिल बंद होने से गन्ना की बुआई की रकबा घटा है। जहां तक किसानों से गन्ना की खरीद की बात है तो जिले में कुल नौ क्रय केंद्र बनाए गए हैं, जिसमें पांच क्रय केंद्रों का गन्ना अंबेडकर नगर के अकबरपुर चीनी मिल को आवंटित किया गया है, जिसमें पायलपार ए, नाथनगर ए, नाथनगर बी, धनघटा ए व धनघटा बी शामिल हैं, जबकि चार केंद्रों का गन्ना बभनान शुगर मिल को आवंटित किया गया है। इसमें पायलपार बी, मीरगंज, माहनपार व नंदौर क्रय केंद्र शामिल हैं। अब अधिकारी भले ही कुछ भी कहें , लेकिन विधान सभा चुनाव की तिथि घोषित होने के बाद एक बार फिर खलीलाबाद चीनी मिल बंद होने का मुद्दा गरमाने के आसार दिखने लगे हैं।
कारण यह है कि सभी राजनीतिक दल किसानों को ही अपने पक्ष में करने के लिए अभी से जुटे हुए हैं। ऐसे में कोई भी दल गन्ना किसानों की इस समस्या को छोड़ना नहीं चाहेगा। इसकी वजह भी है। गन्ना किसानों के लिए नकदी फसल होने के कारण किसान इस पर काफी हद तक निर्भर है। बच्चों की पढ़ाई से लेकर घर-गृहस्थी चलाने के लिए किसान गन्ना पर ही निर्भर रहे हैं, ऐसे में किसानों के दर्द पर मरहम लगाने के लिए यह चुनाव मुद्दा बनेगा।