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Sant Kabir Nagar News: संशोधित... ब्रिटिश मौलाना को झटका, फेमा के तहत दर्ज प्राथमिकी नहीं होगी रद्द

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संतकबीरनगर। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की डबल बेंच ने ब्रिटिश मौलाना शमशुल हुदा खान को झटका देते हुए उसके खिलाफ विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम (फेमा)-1999 के तहत दर्ज मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की ओर से फेमा के तहत दो नवंबर 2025 को खलीलाबाद कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराए जाने के बाद दुधारा थाना क्षेत्र स्थित देवरियालाल गांव निवासी मौलाना शमशुल ने एफआईआर रद्द करने की याचिका दायर की थी।
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याचिकाकर्ता शमशुल हुदा खान के वकील ने हाईकोर्ट की डबल बेंच के समक्ष अपनी दलील में कहा कि जिस मामले में एफआईआर दर्ज हुई है उसमें अधिकतम सात वर्ष की सजा का प्रावधान है। ऐसे में याची की गिरफ्तारी में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के सेक्शन 35 के विशष्टि प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व में दिए गए विभिन्न फैसलों के आलोक में ही कार्रवाई की जाए।
जस्टिस राजीव मिश्रा और जस्टिस डॉ. अजय कुमार द्वितीय की बेंच ने 18 नवंबर को अपने फैसले में कहा कि मामले की सुनवाई के दौरान यह संज्ञान में आया है कि याचिकाकर्ता के खिलाफ संज्ञेप अपराधों में एफआईआर दर्ज है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व में दिए गए कई फैसलों के आलोक में याचिकाकर्ता की उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने की याचिका विचारणीय नहीं है। इस मामले में किसी तरह के हस्तक्षेप की भी जरूरत नहीं है।
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हालांकि कोर्ट ने कहा कि चूंकि दर्ज मामले में सात वर्ष तक की ही सजा है इसलिए संबंधित पक्ष को याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी में बीएनएसएस के सेक्शन 35 के तहत विभिन्न प्रावधानों
और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के फैसलों के तहत ही कार्रवाई की जाए। इसी के साथ कोर्ट ने रिट याचिका निस्तारित कर दी।



मदरसे की वैधता का मामला स्थानीय अदालत भेजा

दूसरी तरफ खलीलाबाद शहर के गोश्त मंडी मार्ग पर पूर्व में सील मदरसे के बगल में संचालित मदरसे की वैधता का मामला हाईकोर्ट की एक अन्य बेंच ने स्थानीय कोर्ट को ट्रांसफर कर दिया है। कोर्ट ने स्थानीय अदालत को जल्द से जल्द मामले को निस्तारित करने का आदेश दिया है। मालूम हो कि सील मदरसे के बगल में चल रहे मदरसे की वैधता को लेकर सहसरांव गांव निवासी अब्दुल हकीम खान से प्रशासन से शिकायत की थी। जिसके बाद मदरसे को अधिकारियों ने सील करते हुए नोटिस पकड़ाया था। नोटिस के बाद प्रबंध तंत्र ने हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट के डायरेक्शन के बाद मामला फिर से स्थानीय न्यायालय में आ गया है। नक्शे से संबंधित समस्त दस्तावेज प्रबंध तंत्र को आपत्ति के रूप में स्थानीय न्यायालय में निर्धारित तिथि में प्रस्तुत करने होंगे। स्थानीय न्यायालय ही मदरसे की वैधता पर फैसला लेगी।



जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की शिकायत पर कोतवाली खलीलाबाद में प्राथमिकी दर्जकर विवेचना की जा रही है। हाईकोर्ट का जो भी आदेश होगा, उसका पालन किया जाएगा।
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सुशील कुमार सिंह, एएसपी
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