संतकबीरनगर। जन साहित्यिक मंच की ओर से रविवार को खलीलाबाद एक स्कूल के सभाकक्ष में मासिक कवि गोष्ठी हुई। इसमें शायर शोहरत अली मजहर खलीलाबादी ने अपनी रचना तेरी निगाह में मैं क्या हूं मुझे नहीं मालूम, तेरी वफा के जो काबिल नहीं तो क्या हूं मैं, सुनाकर गोष्ठी की शुरूआत की।
राधेश्याम मिश्र श्याम ने कैद पंछी का हौसला देखो, कह रहा आसमां हमारा है, सुनाकर गोष्ठी को ऊंचाई प्रदान की। अवधेश पांडेय ने खेल चुके हम बहुत चांदनी के आंगन में, आओ थोड़ा सूरज से भी आंखें मिलाएं, सुनाकर दुख सहन करने के लिए प्रेरित किया। शाहरूख सागर ने छोड़ के शिकवे गिले लग जाइए हमसे गले, जिंदगी का क्या ठिकाना तुम समझते क्यों नहीं, सुनाकर सभी से प्रेम से रहने की अपील की। अध्यक्षता हरिभजन सिंह भजन ने की। गोष्ठी में राजेश मृदुल, विपिन चंद्र जोशी, ज्योति सिंह अहसास ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत की।
इस दौरान अवनीश कुमार, मोहम्मद अली, देवानंद बच्चन आदि मौजूद रहे।