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जबसे शहर में शामिल हुए बढ़ गईं दुश्वारियां

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नगर पंचायत बेलहर कला के भितरी टोले में टूटी नाली और सड़क।संवाद - फोटो : KHALILABAD
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जबसे शहर में शामिल हुए बढ़ गईं दुश्वारियां
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गुजर गए दो साल, नवसृजित नगर पंचायतों में नहीं हुए विकास कार्य
2020 में बेलहर और बखिरा को मिला नगर पंचायत का दर्जा
12 गांव बेलहर में शामिल हुए तो बखिरा में दो बड़ी ग्राम पंचायतें
समय रहते नहीं चेता नगर प्रशासन तो बारिश में उत्पन्न होगी जलभराव की समस्या
अमर उजाला ब्यूरो
बखिरा/संतकबीरनगर। बखिरा और बेलहर कला को नगर पंचायत का दर्जा मिले दो साल से अधिक का समय गुजर गया लेकिन यहां शहरी विकास के कार्य नहीं कराए गए। जबकि दोनों जगहों पर ग्रामीण विकास की योजनाएं बंद हो र्गइं। बारिश का मौसम नजदीक है। यहां जलनिकासी तक की समुचित व्यवस्था नहीं हुई है। साफ-सफाई भी नहीं है। दोनों नगर पंचायतों के लोगों के विकास की आस टूटने लगी है।
शासन ने फरवरी 2020 में बखिरा और बेलहर को नगर पंचायत का दर्जा दिया था। बेलहर में दो बड़ी ग्राम पंचायतें बेलहर कला और बेलहर खुर्द को शामिल किया गया। जबकि बखिरा में 12 ग्राम पंचायतें नगर में शामिल हुईं। नगरीय क्षेत्र में शामिल दोनों जगह ग्रामीण विकास की जो योजनाएं संचालित थीं, वे सभी बंद कर दी गईं हैं। नगर के सभी हिस्सों में सफाई कार्य भी ठीक से नहीं हो पा रहा है। दोनों जगहों पर यदि समय से जलनिकासी की समुचित व्यवस्था नहीं कराई गई तो बारिश में जल भराव की समस्या उत्पन्न होगी। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
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बेलहर नगर पंचायत के रहने वाले सद्दाम, वेद प्रकाश प्रजापति, पप्पू राय, अमरनाथ राय, अशोक राय, रामकिशुन, श्रीनेत, भोनू ने बताया कि शहरी विकास का कार्य नहीं हो पा रहा है। सिर्फ एक पोखरे का सुंदरीकरण का कार्य शुरू हुआ है। इसके अतिरिक्त विकास संबंधी सभी कार्य ठप हैं। नालियां जाम पड़ी हैं। यहां तक नगरीय दर्जा मिलने के बाद भी अभी तक ग्रामीण क्षेत्र की तरह ही बिजली की आपूर्ति होती है। सड़क, शुद्ध पेयजल, नाली निर्माण, स्ट्रीट लाइट, प्रधानमंत्री आवास समेत आदि समस्याएं बनी हुईं हैं।
बखिरा नगर पंचायत के रहने वाले विश्वकेतु यादव, विजय सिंह, नंदलाल सिंह, राजू, शिवशंकर, प्रभाकर मिश्र, संतोष गुप्ता ने बताया कि नगर पंचायत बनने के बाद से यहां के लोगों को शहरी विकास की उम्मीद जगी थी। लेकिन दो साल से अधिक समय बीतने के बाद भी अभी तक नगर पंचायत की स्थिति पहले जैसी ही है। बखिरा कस्बे की साफ-सफाई का कार्य प्रतिदिन होता है लेकिन नगर पंचायत में शामिल बूंदीपार, जसवल भरवलिया, बरईपार, शनिचरा, मेडरापार समेत अन्य क्षेत्रों में सफाई का कार्य कभी-कभी होता है। नाली, बिजली, शुद्ध पानी की व्यवस्था ठीक नहीं है। बिजली गांव जैसी ही मिल रही है। जबकि शहरी क्षेत्र के अनुसार ही अब यहां पर बिजली मिलनी चाहिए। सड़कें अतिक्रमण से संकरी हो गईं हैं। जाम की वजह से सड़क पर वाहनों का चलना मुश्किल होता है। शुद्ध पेयजल के लिए बनी पानी टंकी बेमतलब साबित हो रही है। अब तो लोगों की विकास की आस टूटने लगी है।
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कोट
नगर पंचायत में जो मौजूदा सीमित संसाधन हैं, उसी से सफाई और अन्य कार्य कराया जा रहा है। बोर्ड का गठन दोनों जगह नहीं है। निकाय चुनाव नवंबर में संभावित है। चुनाव होने पर बोर्ड का गठन होगा, उसके बाद ही विकास की योजनाएं रफ्तार पकड़ेंगी। वैसे नगर वासियों को कोई दिक्कत न हो, इसका पूरा ख्याल रखा जाता है।
- प्रदीप कुमार, ईओ
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