मेंहदावल। आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार वितरण की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। अब गर्भवती और धात्री महिलाओं का चेहरा मिलान के बाद ही पोषाहार का पैकेट दिया जाएगा। इसके लिए (एफ आर एस) फेशियल रिकग्नाइजेशन सिस्टम का प्रयोग किया जा रहा है। इससे केवल संबंधित लाभार्थी पोषाहार का उठाव कर पाएंगे जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्भवती, धात्री महिलाओं को पोषाहार दिया जाता है। इस पोषाहार को कुछ केंद्रों से गर्भवती, धात्री की जगह परिवार की अन्य महिलाएं ले जाती हैं। उनके नहीं जाने पर भी पोषाहार का उपयोग हो जाता है। यह अब नहीं हो सकेगा। पोषाहार केवल उसी धात्री या गर्भवती को मिलेगा, जो आंगनबाड़ी पर जाएंगी। यह सिस्टम शुरू होने के बाद इसे अगले चरण में 6 माह से 3 वर्ष तथा केंद्र पर आने वाले 3 से 6 साल तक के बच्चों के लिए भी लागू किया जाना प्रस्तावित है।
सीडीपीओ गरिमा पांडेय ने बताया कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों पर चेहरे की पहचान (फेशियल रिकग्नाइजेशन सिस्टम) के लिए गर्भवती व धात्री महिलाओं के फोटो पोर्टल पर अपलोड किए जा रहे हैं। पोषाहार वितरण के समय लाभार्थी के मोबाइल नंबर पर ओटीपी आएगा। कार्यकर्ता, पोषाहार वितरण करते समय उस ओटीपी को अपने पोषण ट्रैकर पर दर्ज करेंगी। इसके बाद ही पोषाहार देंगी।