संवाद न्यूज एजेंसी
सेमरियावां। प्रधानमंत्री जननी सुरक्षा योजना बजट के अभाव में अगस्त से ठप है। इस अवधि में सीएचसी सेमरियावां क्षेत्र की करीब 2000 से अधिक महिलाएं मां बन चुकी हैं, लेकिन उन्हें अभी तक योजना का लाभ नहीं मिला है। कई तो विभाग के चक्कर भी लगा रही हैं। आशा कार्यकर्ता भी ऐसी महिलाओं को आश्वासन देते-देते थक चुकी हैं।
सेमरियावां ब्लाॅक में 113 ग्राम पंचायत के 183 राजस्व गांवों में 283 आशाओं की तैनाती है। सीएचसी सेमरियावां पर जनपद के बेलहर, बघौली, सांथा के मरीज आते हैं। बस्ती के बाॅर्डर पर बसे गांवों के लोग भी आते हैं। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री जननी सुरक्षा योजना चला रखी है। इस योजना के तहत शहरी की गर्भवती को प्रसव के बाद एक हजार और ग्रामीण क्षेत्र में 1400 रुपये की धनराशि खाते में भेजी जाती है।
योजना का उद्देश्य है कि संस्थागत प्रसव का ग्राफ बढ़े। योजना का दूसरा बड़ा उद्देश्य संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के साथ ही मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाना है। अगस्त से लेकर अभी तक बजट के अभाव के चलते इस योजना के नाम पर किसी भी प्रसूता को धनराशि नहीं मिली है, जिससे क्षेत्र की प्रसूताएं योजना का लाभ पाने को लेकर आशा कार्यकर्ताओं के साथ ही विभाग के चक्कर लगा रही हैं।
हर कहीं से उन्हें आश्वासन देकर चलता कर दिया जाता है। क्षेत्र के इरशाद अहमद, तनवीर चौधरी, इक़्तेदार अहमद, वसीम अहमद, संतोष कुमार आदि ने बताया कि पैसे के लिए प्रसूताएं और परिजन सीएचसी का चक्कर लगा रहे हैं। कोई सुनवाई नही हो रही है।