रविवार को जिले के नौ ब्लाक क्षेत्रों के 557 नव निर्वाचित ग्राम प्रधानों को शपथ दिलाई गई। इसके साथ ही गांव की सरकार ने अपना कामकाज संभाल लिया है। जबकि 236 ग्राम प्रधान कोरम के अभाव में शपथ ग्रहण करने से वंचित रह गए। इन ग्राम प्रधानों को रिक्त ग्राम पंचायत सदस्यों के निर्वाचन के बाद शपथ दिलाई जाएगी।
जनपद के नौ ब्लाकों के 793 ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधान व सदस्य के लिए चुनाव कराया गया था। सांथा विकास खंड के करनजोत में ग्राम प्रधान के एक प्रत्याशी के निधन के कारण चुनाव स्थगित कर दिया गया था। सभी 793 ग्राम प्रधानों के परिणाम घोषित कर दिए गए है।
रविवार को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत नव निर्वाचित ग्राम प्रधानों को ब्लॉक मुख्यालयों पर आयोजित कार्यक्रम में नामित अधिकारियों ने शपथ दिलाई। इस दौरान ग्राम प्रधानों ने गांव का विकास निष्पक्ष ढंग से कराने का संकल्प लिया।
खलीलाबाद ब्लॉक पर आयोजित कार्यक्रम में बीडीओ एवं डीसी मनरेगा विनय कुमार श्रीवास्तव ने शपथ दिलाई। इस दौरान एडीओ पंचायत अशोक कुमार पांडेय, रामदरश यादव सहित तमाम ग्राम प्रधान व समर्थक उपस्थित रहे। जिन ग्राम प्रधानों को शपथ दिलाई गई, उन गांवों के प्रधानों ने कामकाज संभाल लिया है।
26 दिसंबर को ग्राम पंचायतों की पहली बैठक होगी, जिसमें ग्राम समितियों का गठन किया जाएगा। इसका निर्देश बीडीओ ने दिया। उन्होंने कहा कि हर हाल में ग्राम समितियों का गठन पूरा किया जाए, ताकि गांवों को तेजी से विकास हो सके।
नाथनगर ब्लाक क्षेत्र के 103 नव निर्वाचित ग्राम प्रधानों में 53 ग्राम प्रधान व 566 पंचायत सदस्यों को अपर जिला कृषि अधिकारी रामसजीवन सिंह ने रविवार को पद एवं गोपनीयता का शपथ दिलाया। हैंसर एवं पौली प्रतिनिधियों के अनुसार हैंसर ब्लॉक में 57 प्रधानों ने शपथ ली। जबकि पौली में 42 प्रधानों ने शपथ ली।
मेंहदावल प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के 70 प्रधानों ने शपथ लिया। इस दौरान कुछ महिला प्रधान ने घूंघट में शपथ ली। एडीओ पंचायत ने घूंघट हटाने की सलाह देते हुए कहा कि यदि प्रथम नागरिक ही घूंघट में रहेगा तो गांव का विकास कैसे होगा। जिस पर कुछ महिला प्रधान के प्रतिनिधियों ने एतराज भी जताया। सेमरियावां प्रतिनिधि के अनुसार 113 प्रधानों में से 85 प्रधानों ने शपथ लिया।
बेलहर, बघौली, सांथा प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र में निर्वाचित प्रधानों को शपथ दिलाई गई। जिन गांवों में दो तिहाई सदस्य का कोरम पूरा नहीं था, उन गांवों के प्रधान शपथ में भाग नहीं ले पाएं। अब उनको शपथ के लिए उपचुनाव के होने का इंतजार करना पड़ेगा। उसके बाद ही बचे प्रधानों को शपथ दिलाई जा सकती है।