कभी पावरलूम कारोबार मुनाफे का सौदा था। इससे लोग जुड़ रहे थे, लेकिन अब महंगाई की मार और बिजली संकट से पावरलूम का कारोबार चौपट हो रहा है। पीढ़ियों से हुनरमंद हाथों से लिबास बुनने वाले कारोबारी अब संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं। करीब 50 पॉवर लूम बंद हो गए हैं।
जिला बुनकर बाहुल्य है। शहर के अंसार टोला में ही करीब 250 पॉवरलूम हैं। बखिरा के अमरडोभा और मेंहदावल कस्बे में बुनकरों ने अपनी अलग पहचान बनाई। अब इन बस्तियों में हथकरघे और पॉवरलूम की आवाजें थमने लगी हैं। स्थिति यह है कि खलीलाबाद, अमरडोभा, लेडुआ-महुआ, मेंहदावल कस्बा, बेलहर कला, मगहर कस्बे की गलियों में अपनी कारीगरी से कपड़ा बुनते बुनकरों की बेबसी झलक रही है। समय की मार और सरकारों की उपेक्षा ने इलाके के सैकड़ों परिवारों को बदहाली की कगार पर ला दिया है। बुनकरों को 24 घंटे बिजली की आपूर्ति चाहिए, लेकिन वह भी नहीं मिल पा रही है।
1972 से पुश्तैनी कारोबार को वह आगे बढ़ा रहे थे। गमछा, लुंगी आदि बनाते हैं। एक साल से सूत के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। वर्तमान में 1200 की जगह 1900 प्रति बंडल रेट हो गया है। तैयार माल की खपत नहीं हो पा रही है। इस वजह से पॉवरलूम बंद होते जा रहे हैं।
- बदरुज्जमा अंसारी
मोहल्ले में 50 से अधिक कारखाने बंद हो गए हैं। इसकी वजह सूत की महंगाई है। सूत के बंडल पर मूल्य भी अंकित नहीं रहता। महाजन मनमाने दर पर बेचते हैं। बिजली का जो प्लैट दर है, उसमें सब्सिडी की रकम की कटौती विद्युत निगम नहीं कर रहा है।
- मोहम्मद यहिया
सूत की महंगाई और बिजली की समस्या के चलते कारोबार संकट में है। सूत का दाम लगातार बढ़ रहा है। यह चिंता का विषय बन गया है। सरकारों को इस ओर ध्यान देना चाहिए। इसके साथ ही 24 घंटे बिजली की आपूर्ति होनी चाहिए।
- असगर अली
बिजली की फ्लैट रेट की समस्या कई महीनों से बनी हुई है। कोविड काल में कारोबार बंद करना पड़ा था। अब भी समस्या कम नहीं हुई है। सूत के दाम बढ़ गए हैं। ऐसे में इस कारोबार को लेकर सरकार को ध्यान देना चाहिए।
-अहमद अली, अंसार टोला