मृतक के घर गांव के लोग पहुंच कर सांत्वना दे रहे थे। शव को गांव के कब्रिस्तान में सुपुर्दे-ए -खाक किया गया। जिला पंचायत सदस्य अख्तर खान अपने सहयोगियों के साथ बस्ती-बस्ता गांव में देर रात तक डटे रहे। क्षेत्र के गणमान्य लोगों का गांव में आने-जाने का सिलसिला जारी रहा।
मोहम्मद सैफ चार भाई-बहनों में तीसरे नंबर पर था। परिवार में बड़ी बहन तरन्नुम फातिमा (16), भाई मोहम्मद जैद (14) और बहन तबस्सुम फातिमा (9) हैं। काफी चंचल होने के कारण मां-बाप उसे बहुत चाहते थे। वह गांव के ही मदरसे में कक्षा पांच में पढ़ता था। उसके पिता नसीर अहमद किसान हैं, और घर पर ही एक छोटी सी गुमटी में कुछ सामान रख कर बेचते हैं।
दुर्घटना के बाद तमाम अभाव के बावजूद भी गांव वालों के सहयोग से गोरखपुर के एक मेडिकल कॉलेज में बच्चे का इलाज चल रहा था। सुबह तक उसकी हालत में सुधार था और लोग काफी खुश थे, लेकिन दोपहर होते-होते स्थिति बदल गई। बेटे की मौत से मां रैना खातून का रो-रो कर बुरा हाल था। दुर्घटना में चार बच्चों की मौत से क्षेत्र के लोग भी सदमे में हैं।
अब तक इन बच्चों की हो चुकी है मौत
मोहम्मद आरिफ पुत्र वाहिद अली, सुल्तान अहमद पुत्र अजमत अली,तौसीफ पुत्र स्वर्गीय साबिर अली और मोहम्मद सैफ पुत्र नसीर अहमद।