हरिहरपुर। नाथनगर क्षेत्र में गोवंशीय पशुओं में तेजी से फैल रही लंपी बीमारी से पशुपालक काफी परेशान हैं। लोगों का कहना है कि पशुओं का टीकाकरण न होने से बीमारी पांव पसार रही है। पशुपालकों का आरोप है कि रोग से ग्रस्त पशुओं के इलाज में स्थानीय चिकित्सक और चिकित्साकर्मी भी लापरवाही बरत रहे हैं। बीमारी को लाइलाज बताकर इलाज के लिए मोटी रकम की मांग भी करते हैं।
गोवंश के रखरखाव और उनके स्वास्थ्य, संरक्षण के लिए प्रदेश सरकार ने कई कार्यक्रम चला रखे हैं लेकिन पशु चिकित्सा के जिम्मेदार, सरकार की मंशा पर पलीता लगाने पर तुले हुए हुए हैं। क्षेत्र में फैल रही लंपी बीमारी से गोवंशीय पशुओं के मरने से पशुपालक आहत हैं।कई गोवंश लंपी बीमारी से जूझ रहे हैं, लेकिन चिकित्सा के नाम पर अस्पतालों का रवैया बेहद गैरजिम्मेदाराना है।
नाथनगर ब्लाॅक के अलीनगर निवासी विनय कुमार चौरसिया ने बताया कि उनकी गाय को लंपी बीमारी हो गई है जिसके कारण गाय के पैर में गहरा घाव हो गया है।
पशु चिकित्सालय की ओर से कोई टीकाकरण नहीं हुआ है। इलाज के लिए पशु अस्पताल जाने पर चिकित्सक बीमारी लाइलाज बताकर महंगे इलाज की बात करते हैं। ऐसे में पशुपालक अपने पशुओं को बीमारी से तड़पता हुआ देखने को मजबूर हैं।
अलीनगर गांव के ही राधेश्याम मौर्या के बछिया की लंपी बीमारी के चलते मौत हो गई। उनका कहना है कि स्थानीय जिम्मेदार सरकार की योजनाओं का पलीता बना रहे हैं कोई भी पशुपालकों की सुधि नहीं ले रहा है। निबिअहवा पोखरा निवासी रिंकू चौरसिया की गाय भी लंपी के चलते मर गई।
उन्होंने बताया कि दुकान से मंहगी दवा खरीदकर इलाज कराया लेकिन गाय बच नहीं सकी। उन्होंने पशु चिकित्सक और चिकित्साकर्मियों पर इलाज में लापरवाही का आरोप मढ़ा। केशव प्रसाद रावत, अंगूरे बाबा और हरिओम की गाय भी लंपी बीमारी से जूझ रही है।
पशुपालकों का कहना है कि क्षेत्र में तेजी से पांव पसार रही लंपी बीमारी के लिए न टीकाकरण हुआ और न ही अब इलाज हो पा रहा है जिससे पशुपालक व्यवस्था को लेकर आक्रोशित है।
लोगों का कहना है कि पशु महकमें के जिम्मेदार कागजों में ही टीकाकरण और इलाज का कोरम पूरा कर ले रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत ठीक इसके उलट है। लोगों ने लंपी बीमारी से जूझ रहे पशुओं के इलाज और गांवों में टीकाकरण की मांग की है।