मनरेगा: 325 गांवों में काम नहीं, मजदूर बेहाल
संतकबीरनगर। ग्रामीण मजदूरों को रोजगार देने वाली मनरेगा योजना का जिले में बुरा हाल है। 794 ग्राम पंचायतों में से सिर्फ 442 ग्राम पंचायतों में ही मनरेगा का काम चल रहा है। जबकि 352 गांवों में मनरेगा के तहत नहीं कराया जा रहा है। जिससे ग्रामीण मजदूर बेहाल है। इधर मानव दिवस सृजित करने में छह ब्लॉक पिछड़ गए। सीडीओ की ओर से इन ब्लॉकों के एपीओ और बीडीओ को चेतावनी पत्र जारी किया गया है। यदि कार्य में प्रगति नहीं होगी तो एपीओ को मानदेय रोक दिया जाएगा, जबकि बीडीओ को प्रतिकूल प्रवृष्टि दी जाएगी।
मार्च तक जनपद में 4841830 मानव दिवस सृजित करने का लक्ष्य निर्धारित है। इसके सापेक्ष अब तक 3797353 मानव दिवस सृजित हुआ है, जो लक्ष्य का सिर्फ 89 प्रतिशत है। अच्छा काम करने वाले ब्लॉकों में सांथा में 127, हैंसर बाजार में 100 और बघौली ब्लॉक में 94 प्रतिशत मानव दिवस का सृजन किया गया है। खराब प्रगति में खलीलाबाद में 69, सेमरियावां में 77, नाथनगर में 78, मेंहदावल में 81, बेलहर कला में 87 और पौली ब्लॉक में 89 प्रतिशत ही मानव दिवस का सृजन हो पाया है। सीडीओ बब्बन उपाध्याय ने बताया कि जनपद में 794 ग्राम पंचायतें हैं। इसमें 442 ग्राम पंचायतों में ही मनरेगा का काम हो रहा है। 352 ग्राम पंचायतों में मनरेगा का काम नहीं चल रहा है। इन ग्राम पंचायतों के सचिव और रोजगार सेवकों को चेतावनी नोटिस जारी की गई है। इसके बाद भी काम नहीं शुरू किया गया तो संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मानव दिवस का सृजन करने में खलीलाबाद, सेमरियावां, नाथनगर, मेंहदावल, बेलहर और पौली ब्लॉक की प्रगति खराब है। इन ब्लॉकों के एपीओ और बीडीओ को नोटिस जारी कर चेतावनी दी गई है कि जनवरी के अंत तक लक्ष्य हर हाल में पूरा करें, अन्यथा एपीओ का मानदेय रोक दिया जाएगा और बीडीओ को प्रतिकूल प्रवृष्टि दी जाएगी।