कबीर चौरा स्थित अकादमी में कजरी महोत्सव का समापन
संवाद न्यूज एजेंसी
मगहर। उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान लखनऊ, भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय लखनऊ और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे कजरी महोत्सव का समापन बृहस्पतिवार को हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत मिर्जापुर की कलाकार कल्पना गुप्ता ने सखी झूम गावेली कजरिया से की। जिस पर मौजूद श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए।
कार्यक्रम के दौरान लखनऊ की लोकगायिका शिखा श्रीवास्तव ने निर्गुण भक्ति से अपने कार्यक्रम की शुरुआत की। जिसके बाेल थे ‘पिया ऊंची रे अटरिया, तोरी देखन चली’ से की। उसके बाद उन्होंने मिर्जापुरी कजरी पिया मेंहदी सुहाय जयपुर की कजरी गाना गाया। वहीं लखनऊ की युवा कलाकार सृष्टि सिंह परिहार ने मिर्जापुरी ने ‘कजरी झूला डाल देनी निमिया की डार में, सावन की बहार में’ दर्शकों को खूब पसंद आई। उसके बाद लखनऊ की प्रसिद्ध लोकगायिका वंदना मिश्रा ने कजरी लोकगीत ‘अरे रामा सावन में घनघोर बदरिया, छाई रे हरी’ ने दर्शकों को आत्ममुग्ध कर दिया। उनके द्वारा गाया चौमासा मोरे राजा छतरिया छवाओ की रस के बंद पड़े से लोग आनंदित हुए।
कार्यक्रम की अंतिम कड़ी में लखनऊ की कलाकार दीपिका मिश्रा एवं दल द्वारा कजरी गायन व नृत्य की भावविभोर प्रस्तुति दी। उनके द्वारा गीत ‘सइयां जाने दे नैहरवा, मोरी कजरिया बीती जाए ने’ लोगों को झूमा दिया। इस अवसर पर अधिशासी अधिकारी अवधेश अवस्थी, डॉ. हरिशरण दास आदि मौजूद रहे।