मगहर महोत्सव में अवध का लोक नृत्य प्रस्तुत करतीं कलाकार।
संतकबीरनगर। कबीर मगहर महोत्सव के तीसरे दिन कुश्ती, सद्भाव सम्मेलन, लोक गायन, कवि सम्मेलन व मुशायरे का आयोजन हुआ। पूरी रात कवियों व शायरों के गीतों-गजलों पर श्रोता झूमते रहे। दिन में भी हुए कार्यक्रमों का लोगों ने लुफ्त उठाया, हालांकि रात की अपेक्षा दिन में पंडाल में कुर्सियां खाली दिखीं।
बृहस्पतिवार को सबसे पहले सद्भाव सम्मेलन का आयोजन हुआ। इसके बाद कुश्ती, फुटबाल आदि प्रतियोगिताएं हुईं। देर रात में कवि सम्मेलन व मुशायरा का आयोजन हुआ। कबीर की वाणी को जनजन तक पहुंचने के उद्देश्य से कबीर चौरा परिसर में बने महोत्सव मंच पर कबीर मगहर महोत्सव का आयोजन होता आ रहा है। इस बार रात में होने वाले कार्यक्रमों को छोड़कर दिन में आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम उदासीनता की भेंट चढ़ रहे हैं। सुबह 11 बजे से शाम पांच बजे तक आयोजित सांस्कृतिक एवं विभागीय कार्यक्रमों में पंडाल की अधिकतर खाली कुर्सियों की भेंट चढ़ते जाते हैं। कार्यक्रम करने पहुंचे कलाकारों को बस मंच के सामने बैठे कुछ दर्शक या श्रोताओं से ही संतोष कर अपनी प्रस्तुति करना पड़ रहा है।
वहीं विभागीय कार्यक्रम में दर्शकों और श्रोताओं के बगैर मात्र विभाग के अधिकारी कर्मचारियों की ही मौजूदगी कार्यक्रम के उद्देश्यों पर खरा उतरने का प्रयास मात्र साबित हो रहा है। क