मगहर कबीर चौरा परिसर में स्थित आमी नदी में गिराया जा रहा फैक्ट्रियों का गंदा पानी।
संतकबीरनगर। पर्यटकों को लुभाने के लिए प्रशासन संतकबीर दास के परिनिर्वाण स्थली के साथ ही बखिरा झील का विकास करा रहा है, लेकिन छोटी गंगा कही जाने वाली आमी नदी को प्रदूषण मुक्त कराने की मुहिम परवान नहीं चढ़ सकी है।
जमीन के अभाव में अभी तक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लग सका है, जबकि 70 करोड़ की योजना बनी थी। इस योजना के तहत तीन जगह सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाने थे, ताकि यहां आने वाले पर्यटकों को नहाने के साथ ही बेहतर सुविधा मिल सके। ऐसे में पर्यटकों का असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। आमी नदी का नमामि गंगे परियोजना में शामिल किया गया है। यहां पर एनजीटी की टीम ने आकर सर्वे किया था। इस दौरान यह बात सामने आई थी कि नगर पालिका परिषद खलीलाबाद, नगर पंचायत मगहर सहित अन्य नालों का गंदा पानी आमी में गिरता है। जिससे आमी का पानी प्रदूषित हो रहा है। इसके लिए एनजीटी ने जल शोधन संयंत्र लगाने का सुझाव दिया था। इसके लिए इसमें खलीलाबाद के चकपिहनी में 42 करोड़ व मगहर में 28 करोड़ रुपये से जल शोधन संयंत्र का प्रस्ताव बनाया गया था, लेकिन यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है।
इसके साथ ही बखिरा के पास भी जल शोधन संयंत्र लगाया जाना है। इसके लिए नगर पंचायत मगहर में करीब एक एकड़, खलीलाबाद में दो एकड़ और बखिरा में डेढ़ एकड़ जमीन की जरूरत है, लेकिन अब तक उपलब्ध नहीं हो पाई है। कारण यह है कि परियोजना के लिए जमीन निशुल्क उपलब्ध कराई जानी है।