तिघरा। नगर पंचायत बखिरा स्थित बूंदीपार में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथावाचक कुंदन पांडेय ने भगवान के वामन अवतार की महिमा का बखान किया। कहा कि मां लक्ष्मी ने बलि को रक्षाबंधन बांध कर भगवान विष्णु को बतौर नेग वापस पाया था।
कथावाचक ने कहा कि राजा बलि नर्मदा नदी के तट पर अपना 100वां अश्वमेध यज्ञ कर रहे थे। उसी समय भगवान विष्णु एक छोटे कद के ब्रह्मचारी ब्राह्मण (बटुक) का रूप धारण कर वहां पहुंचे। उनके हाथ में छत्र, दंड और कमंडल था। उनकी दिव्यता को देखकर बलि ने वामन देव से कुछ मांगने का आग्रह किया। वामन देव ने राजा बलि से मात्र तीन पग (कदम) भूमि मांगी। बलि के गुरु, शुक्राचार्य, पहचान गए कि यह साधारण बालक नहीं बल्कि स्वयं विष्णु हैं। उन्होंने बलि को दान देने से मना किया, लेकिन बलि अपने वचन पर अडिग रहे और दान देने का संकल्प ले लिया।
जैसे ही बलि ने जल से संकल्प पूरा किया, वामन देव ने अपना विराट रूप (त्रिविक्रम) धारण कर लिया। पहले पग में विष्णु भगवान ने पूरी पृथ्वी नाप ली। दूसरे पग में स्वर्ग लोक और आकाश को नाप लिया। अब तीसरा पग रखने के लिए कोई स्थान नहीं बचा था। ब्रह्मांड के स्वामी के सामने बलि ने अपना अहंकार त्याग दिया और विनम्रतापूर्वक अपना सिर आगे कर दिया। तीसरा पग बलि के सिर पर रखते ही वे पाताल लोक चले गए।
भगवान उनकी दानवीरता और भक्ति से अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने बलि को पाताल का राजा बना दिया और वरदान दिया कि वे स्वयं उनके महल के द्वारपाल बनकर उनकी रक्षा करेंगे। भगवान के इस निर्णय से मां लक्ष्मी चिंतित हो गई। उन्होंने पाताल लोक पहुंचकर युक्ति से राजा बलि को भाई बनाकर रक्षाबंधन बांध दिया। नेग में लक्ष्मी जी ने बलि से विष्णु भगवान को मांग लिया। तभी से रक्षा बंधन का पर्व मनाने की परंपरा शुरू हुई है।
इस अवसर पर कृष्ण कुमार पाठक, अनिल पाठक, रामसरन, ओमप्रकाश सिंह, मदन आदि मौजूद रहे।