रोसयाबाजार। ब्लाॅक क्षेत्र के भरदौलिया स्थित श्रीराम जानकी मंदिर में चल रही भागवत कथा में अवध धाम से आए कथावाचक आचार्य सत्येंद्र दास वेदांती ने श्रीमद्भागवत कथा में परीक्षित जन्म, शुकदेव आगमन, भक्ति-ज्ञान-वैराग्य के संवाद और वराह अवतार की कथाओं का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भक्ति की महिमा, ईश्वर में समर्पण और ज्ञान के माध्यम से आत्मा को परमात्मा से जोड़ने पर श्रीमद्भागवत केंद्रित होता है। श्रीमद्भागवत कथा सामर्थ्यदाता है।
कथावाचक ने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण के अनुसार भक्ति के दो पुत्र ज्ञान और वैराग्य हैं। जो कलयुग के प्रभाव से वृद्ध और अचेत हो गए थे। वृंदावन में नारद जी ने उन्हें जगाया, लेकिन ज्ञान-वैराग्य फिर सो गए। बाद में सनकादिक ऋषियों द्वारा भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के श्रवण से वे पुनः युवा होकर चेतना युक्त हुए। जो ज्ञान-भक्ति के पुनरुद्धार का प्रतीक है। भक्तिज्ञान और वैराग्य की कथा में भक्ति की व्यथा को दर्शाया गया है। नारद मुनि ने एक वृद्धा को देखा, जो वृंदावन में युवा है, लेकिन अन्य स्थानों पर बूढ़ी हो जाती है। उनके साथ दो वृद्ध पुरुष ज्ञान और वैराग्य अचेत अवस्था में पड़े थे। जो कलियुग के प्रभाव के कारण बूढ़े हो गए थे। नारद जी ने ज्ञान और वैराग्य को जगाने के लिए वेद, उपनिषद और गीता का पाठ किया। लेकिन वे थोड़े समय के लिए ही जागे और फिर सो गए।
नारद जी को सनकादि ऋषियों ने बताया कि ज्ञान और वैराग्य को जगाने का इस मौके पर पंडित कृपा शंकर पांडेय,अरविंद सिंह, भुवनेश्वरमणि त्रिपाठी, बब्लू, विनोद पांडेय, प्रेमचंद पांडेय आदि मौजूद रहे।