- सितंबर 2023 का मामला, शिकायत के बाद एडीएम की जांच में उजागर हुआ गड़बड़झाला
- वर्तमान मेंं बहराइच में चकबंदी विभाग में है आरोपी की तैनाती, डीएम ने कार्रवाई के लिए चकबंदी आयुक्त को लिखा पत्र
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। न्यायिक तहसीलदार का प्रभार मिलने के बाद चकबंदी अधिकारी ने बिना जांच-पड़ताल कराए दो दिन में 130 मामलों का निस्तारण कर दिया। महुली क्षेत्र के छितही गांव निवासी पीड़ित की शिकायत पर डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने एडीएम से जांच कराई तो गड़बड़झाला उजागर हो गया। डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने चकबंदी विभाग के उच्चाधिकारियों को विभागीय कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है। बताया जा रहा है कि आरोपी चकबंदी अधिकारी की तैनाती इस समय बहराइच में है।
एडीएम जय प्रकाश ने बताया कि जांच में पाया गया है कि तत्कालीन चकबंदी अधिकारी चंद्रिका प्रसाद शुक्ल को 19 सितंबर 2023 को तहसीलदार न्यायिक खलीलाबाद का प्रभार मिला था। अगले दिन 20 सितंबर को उन्होंने कार्यभार ग्रहण किया और राजस्व संहिता के 33 मामले निस्तारित कर दिए। इसके बाद 21 सितंबर को 97 मुकदमें निस्तारित किए। जांच में पाया गया कि प्रभारी न्यायिक तहसीलदार चंद्रिका प्रसाद शुक्ल ने कई मामलों में बिना अभिलेखों का परीक्षण किए ही आदेश जारी कर दिए। उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया का पालन ही नहीं किया।
कुछ ही दिन बाद चंद्रिका प्रसाद शुक्ल ने अपना स्थानांतरण करा लिया और वह चकबंदी विभाग में वापस चले गए। एडीएम की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने आयुक्त चकबंदी विभाग को आरोपी चंद्रिका प्रसाद शुक्ल के कार्यों की निगरानी कराने और विभागीय कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है।
एक शिकायत की जांच में खुल गए 130 मामले
महुली क्षेत्र के छितही गांव निवासी हफीजुर्रहमान ने 19 मार्च 2024 डीएम से शिकायत की थी न्यायिक तहसीलदार की मिलीभगत से उनके परिवार की बहू ने कूटरचित दस्तावेज के आधार पर मकान का एग्रीमेंट किसी और को कर दिया है।हफीजुर्रहमान का कहना था कि उसने अपने तीन भाइयों के साथ मिलकर नगर पालिका कार्यालय के पास 1983 में जमीन खरीदी थी। वर्ष 2018 में मकान बना। एक भाई अजीजुर्रहमान की शादी नहीं हुई थी, उसकी मौत के बाद उसका हिस्सा मां को मिला। एक जनवरी 2023 को एक अन्य भाई अली अहमद की मौत हो गई। अली के बेटों इफ्तेखार और शादाब को हिस्सा मिला। मई 2023 में शादाब की मौत हो गई। हफीजुर्रहमान का आरोप था कि शादाब की पत्नी ने कूटरचित दस्तावेज तैयार किए और न्यायिक तहसीलदार चंद्रिका प्रसाद शुक्ल को अपनी साजिश में शामिल करके जमीन और मकान का 80 लाख रुपये में मगहर निवासी एक आदमी को रजिस्टर्ड एग्रीमेंट कर दिया। डीएम ने हफीजुर्रहमान की शिकायत पर एडीएम से जांच कराई तो 130 मामले सामने आ गए जिनमें बिना जांच आनन-फानन में आदेश जारी किए गए थे।
चकबंदी अधिकारी को न्यायिक तहसीलदार का प्रभार दिया गया था। उन्होंने बिना जांच बड़ी संख्या में मुकदमों का निस्तारण कर दिया। एडीएम से कराई गई तो मामला सामने आया है। चकबंदी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के लिए विभाग को पत्र भेजा गया है।
- महेंद्र सिंह तंवर, डीएम