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अधूरी विकास परियोजनाएं जोह रहीं बजट की बाट

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करमा खान में बन रहा राजकीय इंटर कॉलेज।संवाद - फोटो : KHALILABAD
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अधूरी विकास परियोजनाएं जोह रहीं बजट की बाट
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दो साल पहले ही पूर्ण हो जानी थीं कुछ परियोजनाएं, कहीं छह महीने तो कहीं साल भर से ठप पड़ा है कार्य
कार्यदायी संस्थाएं बजट नहीं मिलने का सुना रही दर्द
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। बजट के अभाव में जिले में विकास की गति थम गई है। विकास की कुछ परियोजनाओं पर छह महीने तो कुछ पर करीब एक साल से काम बंद पड़ा है। इसमें कुछ परियोजाएं ऐसी हैं, जिन्हें दो साल पहले ही पूर्ण हो जाना था, लेकिन बजट नहीं मिलने से अधूरी पड़ी हैं। पूरी होने की बाट जोह रही हैं। विकास की परियोजनाएं समय से पूरी होती तो लोगों को इसका लाभ मिलता।
प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम के तहत वर्ष 2018 में जिले के करमाखान, दानोकुईया, करही, धर्मसिंहवा और सालेहपुर में पाइप पेयजल परियोजना स्वीकृत हुई थी। इन पांचों गांवों में पेयजल परियोजना की कुल लागत 1262.27 लाख थी। शासन ने कार्यदायी संस्था यूपी सिडको को कार्य कराने की जिम्मेदारी सौंपी। शासन ने इसके लिए कुल 631.15 लाख रुपये अवमुक्त किया। यह परियोजना वर्ष 2020 में पूरा हो जानी थी, लेकिन बजट के अभाव में अधर में है। इसकी वजह से ग्रामीणों को शुद्ध पीने का पानी नहीं मिल पा रहा है। कार्यदायी संस्था यूपी सिडको के अधिशासी अभियंता एसपी सिंह बताते हैं कि अभी तक स्वीकृत बजट का आधा पैसा ही मिला है। इसकी वजह से निर्धारित समय से काम पूरा नहीं हो पाया। करीब साल भर से काम बंद है। करमाखान में राजकीय इंटर कॉलेज वर्ष 2017 में स्वीकृत हुआ था। वर्ष 2019 में कार्य पूरा होना था, लेकिन बजट नहीं मिलने से काम ठप पड़ा है। वैसे 80 प्रतिशत काम पूर्ण हो गया है। काटामान सिंह में राजकीय आईटीआई का निर्माण कार्य भी बजट के अभाव में ठप पड़ा है। इसकी कुल लागत 1267.92 लाख है। अभी तक 633.97 लाख ही मिला है। बजट के अभाव में काम छह महीने से बंद है।
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वर्ष 2019-20 में परसामाफी और मुसहरा में राजकीय इंटर कॉलेज का निर्माण कार्य शुरू हुआ। दोनों जगह 418.11 लाख और 418.11 लाख की लागत से निर्माण कार्य होना है। दोनों जगह निर्माण के लिए 150.52 और 150.52 लाख रुपये कार्यदायी संस्था यूपीपीसीएल को मिला। कार्यदायी संस्था के सहायक अभियंता चंद्रजीत यादव ने बताया कि दीवार खड़ी कर दी गई है। विधानसभा चुनाव के बाद से काम बजट के अभाव में बंद है। डीएम के माध्यम से बजट की मांग की गई है। बजट मिलने पर काम शुरू कराया जाएगा। वर्ष 2017 में सेमरियावां में राजकीय आईटीआई का निर्माण कार्य शुरू हुआ। इसकी लागत 1234.92 लाख है। कार्यदायी संस्था यूपीआरएनएसएस यानी पैक्सफेड को कार्य कराने की जिम्मेदारी दी गई। शासन ने कार्यदायी संस्था को 617.46 लाख रुपये अवमुक्त किया। निर्माण कार्य वर्ष 2020 में पूर्ण हो जाना था, लेकिन अभी तक काम अधूरा पड़ा है। इसी तरह परसामाफी में सद्भाव मंडप बन रहा है। इसकी लागत 234.00 लाख है। अभी तक कार्यदायी संस्था पैक्सफेड को 66.12 लाख मिला है। बजट नहीं मिलने से काम रुका है। कार्यदायी संस्था के अधीक्षण अभियंता परीक्षित त्रिपाठी ने बताया कि सेमरियावां राजकीय आईटीआई का काम 60 प्रतिशत हुआ है। जबकि परसामाफी में बन रहे सद्भाव मंडप का कार्य 44 प्रतिशत हुआ है। बजट नहीं मिलने से दिसंबर 2021 से काम बंद है। बजट की मांग की गई है। जिला अल्प संख्यक कल्याण अधिकारी प्रवीण मिश्रा ने बताया कि यह सच है कि बजट के अभाव में परियोजनाओं का काम रुका पड़ा है। डीएम के माध्यम से शासन से बजट की मांग की गई है। जैसे ही बजट उपलब्ध होगा, वैसे ही कार्यदायी संस्था से संपर्क कर रुका काम शुरू कराया जाएगा।
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कोट
प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम के तहत पांच पाइप पेयजल परियोजनाएं, राजकीय आईटीआई काटामान सिंह एवं राजकीय आईटीआई सेमरियावां की द्वितीय किस्त की मांग शासन से की गई है। जबकि राजकीय इंटर कॉलेज परसामाफी व मुसहारा एवं सद्भाव मंडप परसामाफी के लिए प्रथम किस्त की अवशेष धनराशि कार्यदायी संस्था को आवंटित करने की मांग शासन से की गई है। ताकि अवशेष निर्माण कार्य प्रारंभ कराया जा सके। उम्मीद है कि जल्द ही शासन से बजट मिल जाएगा और रुका काम शुरू कराया जाएगा।
- दिव्या मित्तल, डीएम
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