संतकबीरनगर। बारिश, उमस और धूप के बीच मौसम में लगातार हो रहे बदलाव का असर लोगों की सेहत पर दिखाई देने लगा है। सोमवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचे। कुल 2254 मरीजों ने पंजीकरण कराकर चिकित्सकों से परामर्श लिया। पर्ची काउंटर पर भीड़ के कारण मरीजों को कुछ समय इंतजार करना पड़ा।
मौसम परिवर्तन के बीच सबसे अधिक असर जल जनित बीमारियों, आंखों के संक्रमण और बच्चों में उल्टी-दस्त के रूप में सामने आ रहा है। चिकित्सकों के अनुसार बारिश के बाद जलभराव, दूषित पानी, उमस और अचानक तेज धूप होने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। अस्पताल में इन समस्याओं से जुड़े मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
वरिष्ठ होम्योपैथिक विशेषज्ञ उमेश चंद्रा ने बताया कि बारिश के दौरान जगह-जगह पानी जमा होने और नालियों में गंदा पानी भरे रहने से जल जनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। दूषित पानी के संपर्क और सेवन से संक्रमण तेजी से फैल सकता है। उन्होंने लोगों से साफ और सुरक्षित पानी का सेवन करने तथा घर और आसपास साफ-सफाई रखने की अपील की।
उन्होंने कहा कि मौसम बदलने के साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित होती है। ऐसे में खानपान और स्वच्छता को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
वरिष्ठ नेत्र परीक्षण अधिकारी जीडी यादव ने बताया कि बारिश के बाद तेज धूप और उमस के कारण आंखों से जुड़ी समस्याएं बढ़ी हैं।
मौसम परिवर्तन का असर बच्चों पर भी दिखाई दे रहा है। जिला अस्पताल में 200 से अधिक बच्चे उल्टी, दस्त, पेट दर्द और संक्रमण संबंधी शिकायतों के साथ उपचार के लिए पहुंचे। चिकित्सकों ने जांच के बाद बच्चों को आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया। गंभीर स्थिति वाले बच्चों को भर्ती कर उपचार देने की सलाह दी जा रही है।
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. डीपी सिंह ने बताया कि बारिश के मौसम में दूषित पानी बच्चों के लिए विशेष रूप से नुकसानदायक हो सकता है। अभिभावक बच्चों को उबालकर ठंडा किया हुआ पानी पिलाएं और पानी को हमेशा ढककर रखें। यदि बच्चे को लगातार उल्टी-दस्त हो रहे हों, वह अत्यधिक सुस्त दिखाई दे, खाना-पीना छोड़ दे या शरीर में पानी की कमी के लक्षण दिखाई दें तो देरी किए बिना चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।